- भोपाल से मंदसौर के बीच बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से कई शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी.
- यह एक्सप्रेसवे भोपाल की राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर से कनेक्टिवटी मजबूत करेगा.
- 258 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को मध्य प्रदेश सरकार ने हरी झंडी दे दी है.
भोपाल से मंदसौर के बीच बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच अहम प्रोजेक्ट है. यह एक्सप्रेसवे भोपाल को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा. इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी भी और तेज होगी. यह एक्सप्रेसवे भोपाल से निकलकर सीहोर, शाजापुर, रतलाम नीमच से मंदसौर तक जाएगा. जबकि आगे राजस्थान के उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और कोटा और उदयपुर तक का सफर और आसान हो जाएगा. 258 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को एमपी सरकार की तरफ से हरी झंडी मिल चुकी है. जबकि मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की तरफ से इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. भोपाल और मंदसौर की दूरी में भी बड़ा फर्क आएगा और दोनों शहरों के बीच की यात्रा 7 घंटे की जगह 3.5 घंटे में ही पूरी हो जाएगी.
मध्य प्रदेश राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी
भोपाल मंदसौर एक्सप्रेसवे को राज्य सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद अब काम में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है. यह मध्य प्रदेश के मालवा के प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा. जबकि मंदसौर में राजस्थान की सीमा तक जाएगा. ऐसे में दोनों राज्यों के प्रमुख शहर इस एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होंगे.
- मध्य प्रदेश के शहर: भोपाल से सीहोर, शाजापुर, आगर मालवा, रतलाम और नीमच जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए मंदसौर तक जाएगा.
- राजस्थान के शहर: मंदसौर जिला राजस्थान सीमा से लगा है. ऐसे में राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी शहरों जैसे प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा और उदयपुर तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
भोपाल मंदसौर के बीच बनने वाला यह कॉरिडोर मंदसौर के पास भविष्य में मध्य प्रदेश को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जावरा-मंदसौर सेक्शन के पास कनेक्ट कर देगा. जिससे भोपाल की दूरी राजस्थान के जयपुर, अलवर, और दौसा जैसे शहरों से इंटर-कनेक्टेड हाई-स्पीड हो जाएगी. ऐसे में मध्य प्रदेश को इसका डबल फायदा होगा. क्योंकि एक तरफ देश के दो बड़े शहरों से जुड़ाव और तेज होगा. जबकि समय की बचत भी होगी.
भोपाल-मंदसौर की दूरी होगी कम
इस एक्सप्रेसवे के बनने से भोपाल और मंदसौर जैसे दो बड़े शहरों की दूरी भी कम हो जाएगी. क्योंकि अभी तक भोपाल से मंदसौर जाने के लिए पारंपरिक और व्यस्त राज्य मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी कुल दूरी करीब 350 किलोमीटर हो जाती है, यात्रा का समय 7 से 8 घंटे तक का हो जाता है. लेकिन इसके निर्माण से भोपाल से मंदसौर के बीच की दूरी सीधे 100 किलोमीटर कम हो जाएगी और यह घटकर मात्र 250 किलोमीटर रह जाएगी. जबकि यात्रा का समय भी घटकर सिर्फ 3.5 से 4 घंटे रह जाएगा.
एमपीआरडीसी द्वारा प्रस्तावित भोपाल-मंदसौर एक्सप्रेस-वे हाई-स्पीड कॉरिडोर आर्थिक विकास का नया सेतु बनेगा, जो भोपाल को सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ेगा।
— MPRDC Bhopal (@mismprdc) August 9, 2026
- श्री राकेश सिंह
मंत्री, लोक निर्माण विभाग @CMMadhyaPradesh @MPRakeshSingh @NHAI_Official @bharatyadavias pic.twitter.com/VtwNEbhFpL
क्यों खास है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
भोपाल-मंदसौर के बीच बनने वाला यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश की सबसे अनूठी सड़कों में से एक होगा. क्योंकि यह जमीन की सतह से करीब 8 से 10 फीट की ऊंचाई पर तैयार किया जा रहा है. जिसमें एक्सेस-कंट्रोल्ड दिया जाएगा. यानि आवारा मवेशी, स्थानीय ट्रैक्टर या धीमे चलने वाले वाहन इसमें सीधे प्रवेश नहीं कर सकेंगे. जिससे 100 की रफ्तार से वाहन आसानी से यहां से सफर कर सकेंगे.
2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11500 करोड़ से अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है. जबकि इसके निर्माण को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. हाल ही में सीएम मोहन यादव को इस परियोजना का प्रस्तुतीकरण दिया गया था. जिसे हरी झंडी मिल चुकी है. ऐसे में इस पर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू होने की संभावना है.
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