- भोपाल से जबलपुर के बीच बन रहा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश का अहम प्रोजेक्ट है.
- यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ से आंध्र प्रदेश तक जोड़ देगा. जिससे समय की बचत होगी.
- इसके अलावा भोपाल और जबलपुर की दूरी भी 320 किलोमीटर से घटकर 255 किलोमीटर हो जाएगी.
भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है. क्योंकि यह हाईवे एमपी की उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने जा रहा है. 15000 करोड़ रुपए की लागत का यह प्रोजेक्ट केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है, बल्कि एक विशाल इंटर-स्टेट कॉरिडोर है. जो मध्य भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बदलने प्रोजेक्ट है. यह मध्य प्रदेश को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे अहम राज्यों के और पास लाएगा. भोपाल, रायपुर, विशाखापट्टनम जैसे बड़े शहरों के पास आ जाएगा. जबकि ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे से और भोपाल कानपुर कॉरिडोर से कनेक्ट होने की वजह से यह कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज जैसे शहरों को भी आपस में जोड़ेगा. यही वजह है कि 255 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम माना जा रहा है. इसके अलावा भोपाल और जबलपुर के बीच बन रहे इस एक्सप्रेसवे से दोनों शहरों की दूरी 3 घंटे में पूरी हो जाएगी.
भोपाल का विशाखापट्टनम से कनेक्शन
भोपाल से जबलपुर के बीच बन रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी दक्षिण भारत से मजबूत होगी. दरअसल, भोपाल से विशाखापट्टनम तक एक सीधा हाई-स्पीड रूट तैयार हो रहा है, जो 3 चरणों में तैयार होगा. पहले चरण में भोपाल–जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे रेडी होगा. जो आगे जाकर जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा तक जुड़ जाएगा. यहां से तीसरे चरण में भारतमाला प्रोजेक्ट के जरिए रायपुर से विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जुड़ जाएगा. इस मेगा परियोजना के चलते भोपाल की विशाखापट्टनम से दूरी बहुत कम हो जाएगी. अभी दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग की यात्रा में 22 से 25 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे की वजह से यह दूरी 11 से 12 घंटे में पूरी हो जाएगी.

ये बड़े शहर होंगे कनेक्ट
- मध्य प्रदेश: भोपाल, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर के बीच की दूरी को कम करने में उपयोगी होगा.
- छत्तीसगढ़: रायपुर, कवर्धा, बेमेतरा, सिमागा जैसे शहरों की कनेक्टिविटी एमपी से मजबूत होगी.
- यूपी-दिल्ली: भोपाल सागर रूट के जरिए यह आगे यूपी में झांसी, महोबा और ग्वालियर-आगरा हाईवे के जरिए दिल्ली से कनेक्ट होगा.
- आंध्र प्रदेश: ग्वालियर-लखनादोन एक्सप्रेसवे इंटरचेंज से यह एमपी को विशाखापट्टनम से कनेक्ट कर देगा.
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से मध्यप्रदेश में कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार
— PWD, MP (@pwdminmp) August 12, 2026
✅ भोपाल–जबलपुर के बीच तेज और सुगम होगा आवागमन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा@DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh@MPRakeshSingh @JansamparkMP #LokNirmanSeLokKalyan #JansamparkMP #Jabalpur pic.twitter.com/CZKc1BmdqK
एमपी की दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी
भोपाल जबलपुर एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश की दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. यह जबलपुर से आगे जाकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साथ कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा जैसे शहरों की भोपाल से दूरी बेहद कम हो जाएगी. भोपाल से रायपुर जाने में 14 से 15 घंटे का घटकर मात्र 6 से 7 घंटे रह जाएगा. इसी तरह यह एक्सप्रेसवे आगे चलकर प्रस्तावित ग्वालियर-लखनादोन एक्सप्रेसवे से इंटरचेंज के माध्यम से जुड़ेगा. इससे मध्य प्रदेश की तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से कनेक्टिविटी बढ़ेगी. यानि यह एक्सप्रेसवे मध्य भारत को दक्षिण भारत से कनेक्ट कर देगा.
मध्यप्रदेश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की नई राह
— PWD, MP (@pwdminmp) August 14, 2026
🔹 सागर–जबलपुर, कटनी–सिंगरौली, भोपाल–जबलपुर और भोपाल–ग्वालियर कॉरिडोर से मजबूत होगी कनेक्टिविटी@DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh@MPRakeshSingh @JansamparkMP #LokNirmanSeLokKalyan #Jabalpur #Sagar #Katni #Singrauli #Bhopal pic.twitter.com/V0ISUnBaxs
भोपाल से जबलपुर 3 घंटे में
भोपाल और जबलपुर की दूरी भी अब बेहद कम होने वाली है. वर्तमान में भोपाल से जबलपुर के बीच का सफर बेहद थकाऊ और घुमावदार है. 320 किलोमीटर का सफर तय करने में 6 से 7 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे दोनों शहरों के बीच का ट्रैफिक कम कर देगा. क्योंकि यह मौजूदा नेशनल हाईवे (NH-45) से पूरी तरह अलग एक 'ग्रीनफील्ड' रूट पर बनेगा. यह शहरों और बड़े गांवों को बाईपास कर देगा. जिससे वाहनों की स्पीड 120 किलोमीटर प्रतिघंटे के बीच होगी. जिससे 320 किलोमीटर की दूरी घटकर 255 किलोमीटर रह जाएगी और यह सफर 3 घंटे में पूरा होगा.
भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को एमपी सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की तरफ से इस एक्सप्रेसवे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)तैयार की जा रही है. 2029 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.
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