पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के नवाब परिवार का इतिहास तीन सौ साल से भी ज़्यादा पुराना है. एक ज़माने में मुर्शिदाबाद एक साथ बंगाल, बिहार और ओड़िशा की राजधानी हुआ करता था. नवाबों का राज अब खत्म हो गया है, लेकिन मुर्शिदाबाद में उनकी निशानी और उनके वंशज आज भी मौजूद हैं. मुर्शिदाबाद के बीचों-बीच कई स्थापत्य स्मारक नवाब इतिहास की गवाही देते हुए खड़े हैं. नवाब स्थापत्य कला का सबसे अच्छा नमूना वासेज अली मिर्ज़ा ने बनवाया था. उनके वंशज आज भी इस शहर में रहते हैं. नवाबी तो खत्म हो गई, लेकिन आज नवाबों के वंशजों को अपने नाम के लिए ही संघर्ष करना पड़ रहा है.

अपनी पुश्तैनी हवेली में छोटे नवाब
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नवाब परिवार के सौ सदस्यों के नाम ग़ायब होने पर हंगामा
दरअसल वासेज अली मिर्ज़ा के पोते रेज़ा अली मिर्ज़ा उर्फ़ 'छोटा नवाब' अपने परिवार के साथ मुर्शिदाबाद में रहते हैं. रेज़ा अली मिर्ज़ा और उनके बेटे फ़ईम मिर्ज़ा समेत नवाब परिवार के सौ से ज़्यादा सदस्यों के नाम नई जारी हुई वोटर लिस्ट में नहीं हैं. यह लिस्ट जारी होते ही ज़बरदस्त हंगामा हो गया है.
लिस्ट से अपने परिवार का नाम गायब होने पर छोटे नवाब ने भारी निराशा जताई है. उन्होंने वोटर लिस्ट की समीक्षा के लिए हो रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर नाराज़गी प्रकट की है.रेज़ा अली मिर्ज़ा ने कहा,"हमने अपनी नागरिकता साबित करने के लिए सारे डॉक्यूमेंट जमा किए हैं, लेकिन इसके बाद भी उनका नाम हटा दिया गया है."

मुर्शिदाबाद में नवाबों के समय की काफी निशानियां दिखती हैं
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अब देनी होगी अर्जी
छोटे नवाब के बेटे फईम मिर्जा मुर्शिदाबाद म्युनिसिपैलिटी के वार्ड नंबर 10 से तृणमूल कांग्रेस के पार्षद हैं. उन्होंने कहा कि सारे डॉक्यूमेंट जमा करने के बाद भी नवाब परिवार के सौ से ज़्यादा सदस्यों के नाम लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग यह नहीं बता रहा है कि उन्हें क्यों बाहर किया गया है. उनसे कहा जा रहा है कि नाम शामिल करने के लिए ट्रिब्यूनल में अर्जी देनी होगी.
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