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"अधिकारी चुनाव नहीं जीतते", बंगाल चुनाव से पहले तबादलों पर सियासत; ममता दीदी के समर्थन में उतरे उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के व्यापक तबादले केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में ही होते हैं, लेकिन इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

"अधिकारी चुनाव नहीं जीतते", बंगाल चुनाव से पहले तबादलों पर सियासत; ममता दीदी के समर्थन में उतरे उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला और ममता बनर्जी

विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही पश्चिम बंगाल में सियासत गरमा गई है. चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया. इस मामले में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इस तरह के व्यापक तबादले केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में ही होते हैं, लेकिन इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. पश्चिम बंगाल एक बार फिर वही साबित करेगा, जो मैं हमेशा से मानता आया हूं. दरअसल, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जेपी मीना का तबादला कर दिया गया. इसके अलावा, पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों (पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत) को उनके पदों से हटा दिया गया था. इसके बाद से कई राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है. 

अब्दुला बोले- ममता दीदी भारी बहुमत से जीतेंगी

उमर अब्दुला ने कहा, "राजनीतिक दलों के लिए चुनाव, अधिकारी नहीं बल्कि उनके नेता जीतते हैं. चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों में हेरफेर करने के किसी भी प्रयास से परिणाम नहीं बदलेंगे. मतगणना के दिन ममता दीदी भारी बहुमत से जीतेंगी." इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि जिस तरह से चुनाव आयोग ने बंगाल को निशाना बनाया है, वह न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि बेहद चिंताजनक भी है. 

ममता बनर्जी ने जताई थी आपत्ति

उन्होंने कहा था कि चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों सहित 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से उनके पदों से हटा दिया गया है. यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है.

चुनाव आयुक्त को भी लिख चुकी हैं लेटर

ममता बनर्जी ने 16 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले पर चिंता भी जताई थी. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद बिना किसी ठोस कारण और बिना किसी आरोप के प्रशासनिक अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं.

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