बीएस येदियुरप्पा (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
कर्नाटक में कई टेस्ट पास करने के बाद शनिवार की शाम शाम 4 बजे आखिरी और निर्णायक फ्लोर टेस्ट से पहले ही बीजेपी की येदियुरप्पा सरकार फेल हो गई. येदियुरप्पा सरकार विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई और उससे पहले ही बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले कई टेस्ट से गुजर चुकी बीजेपी को उम्मीद थी कि वह इस फ्लोर टेस्ट में भी पास हो जाएगी. बीएस येदियुरप्पा को उम्मीद थी कि वह सदन में बहुमत साबित कर लेंगे, मगर ऐसा नहीं हो सका. वहीं, कांग्रेस को भी इस बात का पूरा यकीन था कि बीजेपी की सरकार धाराशायी हो जाएगी. इस बीच कोर्ट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कर्नाटक के साथ-साथ देश की जनता टकटकी लगाए तमाम टेस्ट नतीजों को देखती रही. इस कड़ी में अंतिम टेस्ट आज शाम 4 बजे हुआ, जिसका नतीजा यह सामने आया कि बीजेपी कर्नाटक में बहुमत साबित करने में विफल रही और सीएम येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. खास बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसका सीधा प्रसारण टीवी पर किया गया. तो चलिए जानते हैं कि फ्लोर टेस्ट तक पहुंचने से पहले और किस-किस टेस्ट से गुजरी बीजेपी, यहां पढ़ें...
कांग्रेस ने जारी किया एक और ऑडियो टेप, येदियुरप्पा कांग्रेस MLA को प्रलोभन देने की कर रहे हैं कोशिश
कांग्रेस ने जारी किया एक और ऑडियो टेप, येदियुरप्पा कांग्रेस MLA को प्रलोभन देने की कर रहे हैं कोशिश
कर्नाटक चुनाव में बड़ी पार्टी बनते ही बीजेपी की ओर से शपथ ग्रहण की घोषणा कर दी गई. बीएस येदियुरप्पा बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए. कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बीएस येदियुरपा भी गए. उन्होंने पत्र देकर राज्य में सरकार के गठन करने के लिए आमंत्रित करने का अनुरोध किया जिसे राज्यपाल वजुभाई वाला ने स्वीकार कर लिया. 16 मई की रात में ही बीजेपी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी कि 17 मई की सुबह 9:30 बजे मुख्यमंत्री के रूप में बीएस येदियुरप्पा शपथ लेंगे. बीजेपी राज्यपाल टेस्ट में पास हुई और शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू कर दी गई.
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मामला यहीं नहीं समाप्त होना था. कांग्रेस और जेडीएस शपथ ग्रहण को रोकने की अर्जी के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच रात में ही बैठी और इस मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई काफी दिलचस्प रही. अगर शपथ ग्रहण हो जाता है तो कोई आसमान नहीं गिर जाएगा. कोर्ट की ऐसी टिप्पणी और पक्ष-विपक्ष की दलीलों के बीच कोर्ट ने शपथ ग्रहण रोकने पर अपनी सहमति नहीं दी. यह तय हुआ कि शपथ ग्रहण होने दी जाए और अगली सुनवाई 18 मई की सुबह 10:30 बजे हो जिसमें कोर्ट के सामने वह पत्र भी रखी जाए जिसके आधार पर राज्यपाल ने बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. शपथ ग्रहण पर रोक की अपील को खारिज होने के साथ ही बीएस येदियुरप्पा शपथ लेने की बाधाओं को पार कर गए. कोर्ट का यह टेस्ट पास करना येदियुरप्पा की घोषणा को मजबूत कर दिया जिसकी घोषणा परिणाम आने से काफी पहले की गई थी- 'मैं 17 मई को शपथ लूंगा'.
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प्रोटेम स्पीकर बना बीजेपी का, कांग्रेस फिर पहुंची कोर्ट
16 मई की रात को शपथ ग्रहण रोकने को लेकर रातभर कर्नाटक की सियासत पर चर्चा होती रही. फिर 18 मई की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 15 दिन में बहुमत साबित करने की बात को खारिज कर दिया. बीजेपी सात दिन में बहुमत साबित करने की मांग कर रही थी पर कोर्ट को वह भी मंजूर नहीं था. फिर शनिवार 19 मई की शाम 4 बजे सदन में बहुमत साबित करना तय हुआ. अब बात प्रोटेम स्पीकर की आई. इसके लिए एक उम्मीदवार बीजेपी से और एक कांग्रेस से थे जिनके नाम पर चर्चा हुई और बीजेपी नेता केजी बोपैया को राज्यपाल ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया. कांग्रेस ने इस पर संदेह जाहिर करते हुए कोर्ट के शरण में चली गई. सुनवाई हुई और कोर्ट ने इस मामले में एक व्यवस्था दी. वह व्यवस्था कांग्रेस को भी मंजूर था. तय हुआ कि सदन की कार्यवाही की लाइव टेलीकास्ट की जाएगी ताकि किसी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे. और इस प्रकार प्रोटेम स्पीकर के फ्रंट पर भी बीजेपी पास हुई.
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जनता ने बनाया सबसे बड़ी पार्टी
चुनावी रण में घनघोर बयानबाजी और अरोप-प्रत्यारोप के बीच बीजेपी राज्य में हुए 222 विधानसभा सीटों में से 104 सीटों पर कब्जा जमाकर जनता की अदालत में सबसे बड़ी पार्टी साबित हुई. यह पहला टेस्ट था जिसने यह उम्मीद जगाई कि कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बन सकती है. इस तरह जनता के टेस्ट में बीजेपी पास हुई.कांग्रेस ने जारी किया एक और ऑडियो टेप, येदियुरप्पा कांग्रेस MLA को प्रलोभन देने की कर रहे हैं कोशिश
25वें सीएम के रूप में शपथ ग्रहण
कर्नाटक चुनाव में बड़ी पार्टी बनते ही बीजेपी की ओर से शपथ ग्रहण की घोषणा कर दी गई. बीएस येदियुरप्पा बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए. कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बीएस येदियुरपा भी गए. उन्होंने पत्र देकर राज्य में सरकार के गठन करने के लिए आमंत्रित करने का अनुरोध किया जिसे राज्यपाल वजुभाई वाला ने स्वीकार कर लिया. 16 मई की रात में ही बीजेपी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी कि 17 मई की सुबह 9:30 बजे मुख्यमंत्री के रूप में बीएस येदियुरप्पा शपथ लेंगे. बीजेपी राज्यपाल टेस्ट में पास हुई और शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू कर दी गई.
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कोर्ट में भी शपथ ग्रहण को मंजूरी
मामला यहीं नहीं समाप्त होना था. कांग्रेस और जेडीएस शपथ ग्रहण को रोकने की अर्जी के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच रात में ही बैठी और इस मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई काफी दिलचस्प रही. अगर शपथ ग्रहण हो जाता है तो कोई आसमान नहीं गिर जाएगा. कोर्ट की ऐसी टिप्पणी और पक्ष-विपक्ष की दलीलों के बीच कोर्ट ने शपथ ग्रहण रोकने पर अपनी सहमति नहीं दी. यह तय हुआ कि शपथ ग्रहण होने दी जाए और अगली सुनवाई 18 मई की सुबह 10:30 बजे हो जिसमें कोर्ट के सामने वह पत्र भी रखी जाए जिसके आधार पर राज्यपाल ने बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. शपथ ग्रहण पर रोक की अपील को खारिज होने के साथ ही बीएस येदियुरप्पा शपथ लेने की बाधाओं को पार कर गए. कोर्ट का यह टेस्ट पास करना येदियुरप्पा की घोषणा को मजबूत कर दिया जिसकी घोषणा परिणाम आने से काफी पहले की गई थी- 'मैं 17 मई को शपथ लूंगा'.
कपिल सिब्बल बोले- हम खुश हैं कि सारी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होगी, जो जीतेगा वही सिकंदर
प्रोटेम स्पीकर बना बीजेपी का, कांग्रेस फिर पहुंची कोर्ट
16 मई की रात को शपथ ग्रहण रोकने को लेकर रातभर कर्नाटक की सियासत पर चर्चा होती रही. फिर 18 मई की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 15 दिन में बहुमत साबित करने की बात को खारिज कर दिया. बीजेपी सात दिन में बहुमत साबित करने की मांग कर रही थी पर कोर्ट को वह भी मंजूर नहीं था. फिर शनिवार 19 मई की शाम 4 बजे सदन में बहुमत साबित करना तय हुआ. अब बात प्रोटेम स्पीकर की आई. इसके लिए एक उम्मीदवार बीजेपी से और एक कांग्रेस से थे जिनके नाम पर चर्चा हुई और बीजेपी नेता केजी बोपैया को राज्यपाल ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया. कांग्रेस ने इस पर संदेह जाहिर करते हुए कोर्ट के शरण में चली गई. सुनवाई हुई और कोर्ट ने इस मामले में एक व्यवस्था दी. वह व्यवस्था कांग्रेस को भी मंजूर था. तय हुआ कि सदन की कार्यवाही की लाइव टेलीकास्ट की जाएगी ताकि किसी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे. और इस प्रकार प्रोटेम स्पीकर के फ्रंट पर भी बीजेपी पास हुई.
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