- प्रयागराज की पॉक्सो अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया.
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए मामले की न्यायिक जांच की आवश्यकता पर बल दिया.
- उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया.
प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी पुलिस थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का शनिवार को आदेश दिया है. अब इस पूरे मामले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया समाने आई है. उन्होंने कहा कि न्यायालय पर मुझे पूरा यकीन है और मैं न्यायलय के आदेश का सम्मान करता हूं.'

अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके विरुद्ध शिकायत करने वाला व्यक्ति स्वयं एक 'हिस्ट्रीशीटर' है, जिसका नाम कई आपराधिक मामलों में दर्ज है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शामली जिले के संबंधित थाने की दीवार पर अपराधियों की सूची में 34वें नंबर पर उस व्यक्ति का नाम अंकित है. ऐसा दागी व्यक्ति अचानक जगतगुरु रामभद्राचार्य का शिष्य बन जाता है. शंकराचार्य ने आगे कहा, "हम उन लोगों में से नहीं हैं जो अपने ऊपर लगे आरोपों या मुकदमों को हटवा लें."
VIDEO | Varanasi: Shankaracharya Avimukteshwarananda reacts to the Prayagraj court order, saying, “Yes, it is appropriate. Only when a case is registered will the subsequent process of investigation and recording of testimony be completed. Only then will the truth of the false… pic.twitter.com/2BbzaHpjTV
— Press Trust of India (@PTI_News) February 21, 2026
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य द्वारा बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल आवेदन पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने पिछले सप्ताह साक्ष्यों को देखने और पीड़ित बटुकों का बयान दर्ज करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.
याचिकाकर्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बीएनएस की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/5/9 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए यह आवेदन दाखिल किया था. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए झूंसी के थाना प्रभारी को तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के मुताबिक मामले की जांच करने का आदेश दिया.
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