- बंगाल विधानसभा चुनाव में 292 विजेताओं में से लगभग 32 प्रतिशत ने केवल पांचवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई की है.
- इस चुनाव में 13 प्रतिशत महिलाएं विजयी हुई हैं जो पिछले चुनाव के मुकाबले तीन प्रतिशत कम है.
- 65 प्रतिशत विजेताओं ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं जो पिछले चुनाव की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है.
चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था- Association for Democratic Reforms (ADR) और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच ने पश्चिम बंगाल में 292 चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों द्वारा दिए गए एफिडेविट का विश्लेषण किया है, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों की सामाजिक, आपराधिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के बारे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
NDTV से बातचीत में नेशनल इलेक्शन वॉच/ADR के प्रोग्राम एसोसिएट नवीन सिंह मोनी ने कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में धनबल और बाहुबल का प्रभाव बढ़ा है. चुनाव जीतने वाले 92 (32%) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 5वीं पास से 12वीं पास के बीच घोषित की है. 5 विजयी उम्मीदवारों ने अपनी शिक्षा सिर्फ साक्षर बताई है और 1 विजेता उम्मीदवार ने अपनी शैक्षणिक योग्यता निरक्षर बताई है.
यानि, चुनाव जीतने वाले विधायकों में लगभग हर तीन में एक नवनिर्वाचित विधायक ने स्कूल के आगे पढ़ाई नहीं की है. विश्लेषण किए गए 292 विजेता उम्मीदवारों में सिर्फ 37 (13%) विजेता उम्मीदवार महिलाएं हैं. 2021 में 292 विधायकों में से 40 (14%) विधायक महिलाएं थीं. यानि, पांच साल में चुनाव जीतने वाली महिलाओं की संख्या 3 कम हो गयी है!
2026 विधान सभा चुनाव में 292 विजेता उम्मीदवारों में से 190 (65%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. 2021 के चुनाव के दौरान 292 विधायकों में से 142 (49%) विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे. यानि, आपराधिक पृस्ठभूमि वाले विधायकों की संख्या इस बार 16% तक बढ़ गयी है. 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दोबारा चुने गए विधायकों की संख्या 102 है. इनकी औसत संपत्ति में पिछले पांच साल में 1.43 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, यानी 60% ज़्यादा.
विजयी उम्मीदवारों की कुल संपत्ति
292 विजयी उम्मीदवारों के पास कुल संपत्ति रु. 1,091 करोड़ है. चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 3.73 करोड़ रुपये है, जो 2021 के चुनाव में 2.53 करोड़ रुपये था.
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