New Delhi:
अन्ना हजारे ने अलग से सिटीजन चार्टर लाने के सरकार के प्रस्ताव में यह कहते हुए खोट निकाला कि यह संसद की ओर से उन्हें दिए गए आश्वासन के खिलाफ है। हजारे ने इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से अनुरोध किया कि वह लोकपाल के मुद्दे पर यूपीए सरकार पर वैसे ही दबाव बनाएं जैसा कि उन्होंने खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर बनाया था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, सिटीजन चार्टर को अलग कानून के रूप में नहीं पेश किया जाना चाहिए। जब संसद ने अपना निर्णय दे दिया है, तो उसके लिए अलग विचार देने की क्या आवश्यकता है। यह सही नहीं है। हजारे की ओर से यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अन्ना पक्ष की कोर कमेटी की बैठक कर रही है। इस बैठक का आयोजन मजबूत लोकपाल विधेयक संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में पारित नहीं होने की स्थिति में रामलीला मैदान मे प्रस्तावित आंदोलन सहित भविष्य की अन्य योजनाएं तय करने के लिए किया गया है। अन्ना हजारे ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उनकी चिंताओं को दूर करने वाला लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने की स्थिति में 27 दिसम्बर से अनिश्चित कालीन अनशन पर जाने के उनके निर्णय पर अंतिम विचार-विमर्श किया जाना है।
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