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ये तो सिर्फ एक... आश्रम में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आ गया रिएक्शन

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज की POCSO कोर्ट में याचिका दायर की गई है. रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाया है, जबकि शंकराचार्य ने इसे 'गौ रक्षा' आंदोलन को दबाने की राजनीतिक साजिश बताया है.

ये तो सिर्फ एक... आश्रम में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आ गया रिएक्शन
  • माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दो नाबालिगों के यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा है.
  • रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने विशेष POCSO अदालत में याचिका दाखिल कर यह आरोप प्रस्तुत किया है.
  • आरोपों को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच तनाव और विवाद गहरा गया है.
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वाराणसी:

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले  से शुरू हुआ संतों का आपसी विवाद अब एक अत्यंत संवेदनशील और कानूनी मोड़ ले चुका है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत में याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए हैं. इस याचिका में दावा किया गया है कि माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिविर में दो नाबालिगों के साथ यौन शोषण हुआ है, जिसकी आपबीती खुद बच्चों ने सुनाई है. यौन शोषण जैसे इन संगीन आरोपों ने संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच हड़कंप मचा दिया है.

वहीं, दूसरी ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'गौ रक्षा' के लिए मुखर होकर आवाज उठा रहे हैं, जिससे सत्ता पक्ष असहज है. शंकराचार्य का तर्क है कि चूंकि सरकार गौ संरक्षण के मुद्दे पर उनकी आवाज दबा नहीं पा रही है, इसलिए अपने ही लोगों (विरोधियों) के माध्यम से उन पर ऐसे घृणित और झूठे आरोप लगवाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है.

इससे पहले विवाद मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ, जब शंकराचार्य संगम स्नान के लिए जा रहे थे. पुलिस ने बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन के नाम पर उन्हें रोका, जिसके बाद शिष्यों ने विरोध किया और झड़प हो गई. शंकराचार्य ने इसे अपमान बताते हुए 10-11 दिनों तक धरना दिया, अनशन किया और अंततः बिना स्नान किए 28 जनवरी को मेला छोड़कर वाराणसी लौट गए. उन्होंने योगी सरकार पर 'नकली हिंदू' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. 

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