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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले की सुनवाई से अलग हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, अब आगे क्या होगा?

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन  आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले की सुनवाई से अलग हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, अब आगे क्या होगा?

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को मिली अंतरिम जमानत की शर्तों के उल्लंघन के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए मामले को दूसरी बेंच को सौंपने के लिए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है.

बुधवार 6 मई 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर यह आदेश दिया है. अब इस मामले में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली की तरफ से सुनवाई के लिए दूसरी बेंच का गठन किया जाएगा. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चीफ जस्टिस से नॉमिनेशन मिलने के बाद इस मामले को दूसरी बेंच के सामने रखा जाए.

किस आरोप में दायर हुई है याचिका?

दरअसल आशुतोष ब्रह्मचारी ने कथित यौन उत्पीड़न में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है. याचिका में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के अलावा प्रयागराज की मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त समस्त कई अन्य अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया है.

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर अंतरिम जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में दोनों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी को 25 मार्च 2026 को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दी थी. हाईकोर्ट ने मामले में विसंगतियों का हवाला देते हुए यह राहत दी थी. प्रयागराज के झूंसी थाने में 21 फरवरी को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत अन्य के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न करने के मामले में प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई थी. 

इसके खिलाफ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी मुकुंदानंद ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत पर आदेश देते हुए आवेदकों, पीड़ितों और शिकायतकर्ता तीनों पक्षों को इस मामले के लंबित रहने तक मीडिया में कोई भी साक्षात्कार देने पर रोक लगा दी थी.

क्या है पूरा मामला?

प्रयागराज माघ मेले के दौरान यह विवाद शुरू हुआ था जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने आरोप लगाया था कि बटुकों का यौन उत्पीड़न किया गया जिसके बाद आठ फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. पॉक्सो कोर्ट के स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने 21 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुनाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

वहीं अब इस चर्चित मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन  आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की है. आशुतोष महाराज ने अंतरिम जमानत के आदेश का कथित रूप से उल्लंघन किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है. वादी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और स्वामी मुकुन्दानंद गिरी की खिलाफ अवमानना याचिका, सिविल इन पर्सन दाखिल की है.

इस अवमानना याचिका में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, स्वामी मुकुंदानंद गिरी सहित वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज का मंडलायुक्त को प्रतिवादी बनाया गया है. इसके अलावा पुलिस आयुक्त लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज को भी प्रतिवादी बनाया गया है.

याचिका में आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के अंतरिम जमानत आदेश का पालन नहीं किया गया जिससे न्यायालय की अवमानना की स्थिति उत्पन्न हुई है. दाखिल की गई अवमानना याचिका पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने खुद को सुनवाई से अलग करते हुए मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है.

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