महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार के दुखद निधन के बाद, उनके करीबी सहयोगियों में से एक निजी ड्राइवर श्यामराव मणवे ने उस रात की अनकही कहानी साझा की है. मणवे के खुलासे से पता चला कि कैसे एक रात पहले अजित पवार की यात्रा का प्लान बदला.
'दादा अनुशासन के पक्के'
श्यामराव मणवे बताते हैं कि,"मैं 2009 से दादा अजित पवार के साथ हूं. पहले मैं सरकारी सेवा में था और 2013 में रिटायर होने के बाद पिछले 12 सालों से उनके पास निजी तौर पर काम कर रहा हूं. दादा समय के बहुत पक्के थे और साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखते थे. अगर वो कहते थे कि सुबह 6 बजे तैयार रहना, तो हम सब 5:30 बजे ही तैयार हो जाते थे. लोगों को लगता है कि वो कड़क स्वभाव के थे, लेकिन ये बात गलत है. वो बस अनुशासन के पक्के थे, किसी को बेवजह कुछ नहीं बोलते थे."
'मीटिंग में हो गई थी देरी...'
श्यामराव मणवे उस रात के बारे में बताते हैं कि "मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग खत्म होने के बाद हमारा तय हुआ था कि हम सड़क मार्ग से पुणे और फिर बारामती जाएंगे. सुबह 10 बजे बारामती में सभाएं तय थीं. हमारे लड़के शंकर ने गाड़ियों में बैग भी रख दिए थे. 99% तय था कि हम गाड़ी से ही जाएंगे. मीटिंग की वजह से रात में बहुत देरी हो गई थी. इसलिए आखिरी समय पर फैसला बदला गया कि सुबह सीधे विमान से बारामती जाएंगे. दादा ने मुझसे कहा कि तुम कल गाड़ी लेकर पुणे आ जाना और मैं बारामती से पुणे आऊंगा."
'दादा सभी की मदद करते थे'
अजित पवार के मदद वाले स्वभाव पर उन्होंने कहा "चाहे कोई सामान्य व्यक्ति हो या छोटा-बड़ा, वो सबकी मदद करते थे. यहां तक कि कोरोना काल में और बंगले पर आने वाले मीडिया कर्मियों के लिए भी वो खुद चाय-नाश्ते का इंतजाम करने को कहते थे."
अजित पवार को याद करते हुए श्यामराव बोलते हैं कि "मुझे बहुत दुख हो रहा है. मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मेरा मन तो अभी भी यही कह रहा है कि दादा अभी भी हमारे बीच हैं, वो कहीं नहीं गए हैं."
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