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बैंकों और NBFC के लिए AI बना सबसे बड़ा साइबर खतरा, चौंकानेवाली है RBI की रिपोर्ट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन गया है. 95% संस्थान AI आधारित साइबर खतरों को सबसे गंभीर मानते हैं. आरबीआई की ताजा सर्वे रिपोर्ट में ये चौंकानेवाली बात सामने आई है.

बैंकों और NBFC के लिए AI बना सबसे बड़ा साइबर खतरा, चौंकानेवाली है RBI की रिपोर्ट
AI बना सबसे बड़ा साइबर खतरा
  • AI की तेजी से बढ़ती उपयोगिता के कारण बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा खतरे गंभीर हो गए हैं
  • RBI की रिपोर्ट के अनुसार AI आधारित साइबर हमले पारंपरिक सुरक्षा उपायों से अधिक तेज और जटिल होते जा रहे हैं
  • सर्वे में 95 प्रतिशत वित्तीय संस्थानों ने AI से जुड़े साइबर खतरों को सबसे बड़ा जोखिम बताया है
नई दिल्‍ली:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगभग हर क्षेत्र में लोगों की मुश्किलें आसान करने का साधन बन गया है. ये घंटों का काम मिनटों में कर देता है. हालांकि, हर चीज के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबकी पहुंच में है, साइबर अपराधी भी AI का गलत इस्‍तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं, जिससे बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों की चिंता बढ़ गई है. हाल ही में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है. ऐसे में देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ा साइबर सुरक्षा जोखिम बनती दिख रही है. 

ये हैं तीन सबसे बड़े जोखिम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े खतरे रिस्क की लिस्ट में सबसे ऊपर आ गए हैं और इसकी वजह है इनकी स्पीड और बड़े पैमाने पर होने की क्षमता. आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, AI में तेजी से हो रही वृद्धि साइबर हमलों को ज्‍यादा एडवांस, तेज और बड़े पैमाने पर कर सकती है, जिसका मुकाबला पारंपरिक हमले के तरीके नहीं कर सकते. एक AI सिस्टम अकेले काम करने वाले किसी इंसान के मुकाबले कहीं ज्‍यादा तेजी से कमजोरियों का पता लगा सकता है, भरोसेमंद लगने वाले फिशिंग मैसेज बना सकता है या रियल-टाइम में अपने काम करने के तरीके को बदल सकता है.

साइबर फ्रॉड से सावधान

साइबर फ्रॉड से सावधान

सर्वे में शामिल 95 प्रतिशत लोगों ने AI-आधारित साइबर खतरों को आने वाले साल के लिए अपने तीन सबसे बड़े जोखिमों में गिना. यह आंकड़ा थर्ड-पार्टी और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम (70 प्रतिशत), रैंसमवेयर और मैलवेयर (28 प्रतिशत), एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस और एप्लिकेशन की कमियों (23 प्रतिशत), फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग (23 प्रतिशत) और वल्नरेबिलिटी या पैच मैनेजमेंट (14 प्रतिशत) से कहीं ज्‍यादा है.

साइबर अपराधी ठगने के लिए कर रहे AI टूल्‍स का यूज 

रिजर्व बैंक की फाइनेंशियल स्‍टेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, 95 प्रतिशत बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने 'AI से जुड़े साइबर खतरों' को अपनी सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा चिंता बताया है. सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधी अब AI का इस्तेमाल पहले से अधिक तेज, सटीक और ऑर्गेनाइज तरीके से हमले करने के लिए कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, AI आधारित साइबर खतरे 95 प्रतिशत संस्थानों के लिए सबसे बड़ा जोखिम हैं. वहीं, थर्ड पार्टी और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम 70 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक और एनबीएफसी बड़ी संख्या में बाहरी तकनीकी कंपनियों, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर किसी तीसरे पक्ष की सुरक्षा कमजोर होती है, तो उसका असर सीधे वित्तीय संस्थानों पर पड़ सकता है.

AI से रैनसमवेयर और मैलवेयर हमले

एआई से रैनसमवेयर और मैलवेयर हमले भी बढ़ रहे हैं. सर्वे में बताया गया है कि रैनसमवेयर और मैलवेयर हमलों को 28 प्रतिशत कंपनियों ने प्रमुख खतरा माना है. ऐसे हमलों में साइबर अपराधी डेटा को हैक कर फिरौती की मांग करते हैं या सिस्टम को पूरी तरह ठप कर देते हैं. पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में ऐसे हमलों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है. कंपनियों का मानना है कि ऐसे मामले बढ़ने की वजह एआई का बढ़ता इस्‍तेमाल है. 

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बढ़ रहे फिशिंग हमले

फिशिंग हमले और एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API Vulnerabilities) भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 23 प्रतिशत संस्थानों ने फिशिंग और 23 प्रतिशत ने एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस की कमजोरियों को बड़ा जोखिम बताया है. फिशिंग के जरिए अपराधी फर्जी ईमेल, संदेश या वेबसाइट के जरिए ग्राहकों और कर्मचारियों से संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं. वहीं एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस की सुरक्षा में खामी होने पर हैकर्स बैंकिंग सिस्टम तक अवैध पहुंच बना सकते हैं. ऐसा करना एडवांस एआई टूल्‍स आने के बाद कुछ हद तक आसान हो गया है. 

रिपोर्ट में पैच मैनेजमेंट (Patch Management) यानि खामियों को समय पर ठीक करने को भी एक बड़ा चैलेंज बताया गया है. 14 प्रतिशत कंपनियों ने समय पर सिक्‍योरिटी अपडेट और पैच लागू न होने को साइबर हमलों का कारण माना है. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार पुराने सॉफ्टवेयर और अनअपडेटेड सिस्टम हैकर्स के लिए आसान निशाना बन जाते हैं.  AI की मदद से अब साइबर अपराधी ज्‍यादा रियल दिखने वाले फिशिंग ईमेल तैयार कर सकते हैं, डीपफेक ऑडियो और वीडियो के जरिए धोखाधड़ी कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं. 

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कैसे रहें AI साइबर खतरों से अलर्ट 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए बैंकों और NBFCs को सिर्फ पुराने साइबर सुरक्षा उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. AI आधारित सुरक्षा समाधान, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, नियमित सिक्योरिटी ऑडिट, समय पर पैच अपडेट, कर्मचारियों का साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और थर्ड पार्टी जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है. आरबीआई का संदेश साफ है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में AI जहां ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने का माध्यम बन रहा है, वहीं यही तकनीक साइबर अपराधियों के हाथों में एक बेहद शक्तिशाली हथियार भी बन चुकी है. ऐसे में वित्तीय संस्थानों के लिए साइबर सुरक्षा में लगातार निवेश और नई तकनीकों को अपनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन गया है.

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