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महाराष्ट्र की सियासत में नहीं थम रहा बवाल, अब शिवसेना में नाराजगी? CM शिंदे से मिले फडणवीस, 10 बड़ी बातें

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अजित पवार खेमे से नौ मंत्रियों के शामिल होने के बाद, शिंदे-फडणवीस कैबिनेट में कुल 29 मंत्री हो गए हैं
मुंबई:

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच सत्ता को लेकर चल रहे संघर्ष के बीच उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बृहस्‍पतिवार देर रात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की. अजित पवार खेमे से नौ मंत्रियों के शामिल होने के बाद, शिंदे-फडणवीस कैबिनेट में कुल 29 मंत्री हो गए हैं, जबकि 14 पद अब भी खाली हैं.

  1. एनसीपी के अजित पवार के सरकार में शामिल होने के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गुट में बेचैनी बढ़ गई है. कुछ नाराजगी के सुर भी उठने लगे हैं. शिवसेना के विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए कल रात मुख्यमंत्री एकनाथ शिन्दे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच लंबी चर्चा हुई. ये बैठक मालाबार हिल के नंदनवन सरकारी बंगले में हुई. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में  मंत्रिमंडल विस्तार और निगम आवंटन पर चर्चा हुई.

  2. महाराष्‍ट्र सरकार में अगले सप्ताह मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. सूत्रों की मानें तो इसमें शिवसेना और बीजेपी विधायकों को प्रमुखता दी जाएगी. ऐसे में विरोध सुर और बढ़ने की आशंका है. बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ जल्द से जल्द निगम-महामंडल का बंटवारा कर असंतोष दूर करने की कोशिश भी जायेगी. सीएम शिंदे और फडणवीस के बीच देर रात हुई बैठक में साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई कि भले ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सत्ता में साथ में है, लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि भाजपा और शिवसेना के विधायकों के साथ कोई अन्याय न हो. 

  3. इससे पहले अजित पवार के महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शामिल होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को शिवसेना के जनप्रतिनिधियों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और कहा कि परेशान होने की कोई बात नहीं है. शिवसेना के नेताओं ने यह जानकारी दी, उन्होंने बताया कि शिंदे ने शिवसेना विधायकों, एमएलसी और सांसदों की बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने बताया कि शिंदे को दो जुलाई को अजित पवार के सरकार में शामिल होने और आठ अन्य राकांपा नेताओं के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के घटनाक्रम की उन्हें जानकारी थी.

  4. अजित पवार खेमे से नौ मंत्रियों के शामिल होने के बाद, शिंदे-फडणवीस कैबिनेट में कुल 29 मंत्री हो गए हैं, जबकि 14 पद अब भी खाली हैं. इन खाली पदों पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई है. हर खेमा चाहता है कि सत्‍ता में उसकी ज्‍यादा से ज्‍यादा हिस्‍सेदारी हो. 

  5. शिंदे के नेतृत्व वाले समूह से संबंधित महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि शिंदे के इस्तीफे के बारे में खबरें झूठी हैं. हम इस्‍तीफा देने नहीं जा रहे हैं, बल्कि हमारी हिस्‍सेदारी बढ़ने जा रही है. हम सभी को एकनाथ शिंदे पर पूरा भरोसा है. इधर, शिंदे ने उन खबरों को ‘विपक्ष द्वारा फैलाई गई अफवाहें' बताया जिनमें कहा गया है कि अजित पवार और राकांपा के आठ अन्य विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है.

  6. शरद पवार ने औपचारिक रूप से अपने भतीजे और पूर्व शीर्ष सहयोगी प्रफुल्ल पटेल सहित 12 विद्रोहियों को निष्कासित कर दिया. शरद पवार द्वारा आयोजित राकांपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पर अजीत पवार गुट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि इसकी "कोई कानूनी पवित्रता नहीं है."

  7. राकांपा प्रमुख शरद पवार ने दिल्ली में अपने भतीजे की उम्र संबंधी टिप्पणी पर भी निशाना साधते हुए कहा, ''मैं अभी भी प्रभावी हूं, चाहे मैं 82 साल का हो जाऊं या 92 साल का.'' जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने भतीजे द्वारा ठगा हुआ महसूस हुआ है? उन्होंने कहा, "नहीं, पार्टी सर्वोच्च है और मैं पार्टी के फैसले से बंधा हुआ हूं."

  8. अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट, जो सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो गया और रविवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, उनका कहना है कि यह असली एनसीपी है और उसने चुनाव आयोग से पार्टी के नाम और प्रतीक का दावा किया है. अब तक उन्हें 32 विधायकों का समर्थन मिलता दिख रहा है. शरद पवार के पास 14 का समर्थन है, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा उनके दावे पर विचार करने से पहले उन्हें 36 विधायकों की जरूरत है, जो पार्टी के 53 विधायकों में से दो-तिहाई बहुमत है.

  9. शरद पवार ने चुनाव निकाय को पत्र लिखकर पार्टी चिन्ह के लिए अपने भतीजे के दावे पर आपत्ति जताई है. सूत्रों ने संकेत दिया है कि वरिष्ठ पवार कानूनी सलाह लेंगे और आगे की रणनीति के बारे में पार्टी नेताओं से चर्चा करेंगे.

  10. विद्रोहियों ने अपने विद्रोह से केवल दो दिन पहले, शरद पवार को उस पार्टी के शीर्ष पद से हटा दिया था, जिसे उन्होंने स्थापित किया था और दो दशकों से अधिक समय तक नेतृत्व किया था. चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि विद्रोहियों के पत्र के अनुसार, उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के उनके चौंकाने वाले कदम से कुछ दिन पहले 30 जून को अजित पवार को पार्टी अध्यक्ष नामित किया था.


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