- मेघालय सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रावधानों और प्रभावों का गहराई से अध्ययन कर रही है.
- मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बताया कि पहले UCC को लेकर कई तरह की आशंकाएं और भ्रम थे.
- मेघालय की प्राथमिकता जनजातीय परंपराओं, पारंपरिक कानूनों और मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था की सुरक्षा है.
असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास होने के बाद पूर्वोत्तर में सियासी हलचल तेज हो गई है. मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा है कि उनकी सरकार UCC के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों का गहराई से अध्ययन कर रही है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.
संगमा ने कहा कि पहले UCC को लेकर कई तरह की आशंकाएं थीं क्योंकि कानून के प्रावधान साफ नहीं थे और यूनिफॉर्म सिविल कोड शब्द ने अलग-अलग समुदायों में अलग-अलग तरह की चिंताएं पैदा की थीं.
जनजातीय पहचान सबसे बड़ी चिंता
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मेघालय की सबसे बड़ी प्राथमिकता जनजातीय परंपराओं की सुरक्षा, पारंपरिक कानून और राज्य की मातृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था (Matrilineal system) को बचाना है. उन्होंने कहा कि पहले राज्य सरकार को डर था कि UCC लागू होने से इन परंपराओं में दखल हो सकता है.
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असम और उत्तराखंड मॉडल से मिली राहत
हालांकि, संगमा ने बताया कि असम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में लागू या प्रस्तावित कानूनों को देखने के बाद यह सामने आया है कि जनजातीय समुदायों और उनके पारंपरिक कानूनों को काफी हद तक दायरे से बाहर रखा गया है. जिससे मेघालय सरकार को कुछ हद तक राहत मिली है.
'हर पहलू पर होगा गंभीर विचार'
संगमा ने साफ किया कि मेघालय सरकार UCC को लेकर संवैधानिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है. जब तक पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा.
जनजातीय हित सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि कोई भी कानून राज्य की पहचान, पारंपरिक प्रथाओं और जनजातीय अधिकारों को नुकसान न पहुंचाए. उन्होंने दोहराया कि आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी.
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