- AI और डीपफेक का उपयोग कर पाकिस्तान द्वारा गलत सूचना और फर्जी वीडियो बड़े पैमाने पर फैलाए जा रहे हैं.
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने साइबर माध्यम से बड़े पैमाने पर झूठी सूचनाएं फैलाई.
- भारतीय सेना के ADG मेजर जनरल संदीप शारदा ने चार महीनों में 217 डीपफेक वीडियो का खुलासा किया.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में गलत सूचनाओं को फैलाना बड़ा आसान हो गया है. बड़ी आसानी से वीडियो बाइट, ऑफिसियल लेटर से लैस फर्जी जानकारी और सूचनाएं तैयार कर दी जाती हैं. छोटे-बड़े साइबर क्राइम के साथ-साथ दो देशों के बीच चल रहे तल्खी के दौर में AI और डीपफेक वीडियो का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के दौर में पाकिस्तान सेना द्वारा बड़े पैमाने पर इस तरह के अदृश्य हमले किए जा रहे हैं. इंडियन आर्मी का कम्युनिकेशंस डिपार्टमेंट पाकिस्तान की ओर से चल रही इस अनविजिबल जंग को लड़ रही हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस तरह के कई मामले सामने आए.
भारतीय सेना के ADG ने दिल्ली में दी जानकारी
बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार में भारतीय सेना के ADG स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस मेजर जनरल संदीप शारदा ने इस जंग के बारे में कई बातें बताई. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से सीमाई इलाकों पर केवल गोले ही नहीं दागे गए, बल्कि गलत सूचनाओं की बाढ़ भी फैलाई गई. डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, आधिकारिक चैनलों के माध्यम से झूठ, प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी भ्रामक जानकारी ऐसे फैलाई गई कि सच की पहचान करना मुश्किल हो गया था.
डीजी आईएसपीआर के जरिए गढ़ी गई फर्जी कहानियां
मेजर जनरल संदीप शारदा ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन ही पूर्वाग्रह से भरी सूचनाएं दिखने लगी थी. न्यूज चैनलों की रिपोर्टिंग भी वैसी ही थी, जैसा पाकिस्तानी सेना चाहती थी. हर चैनल अपने संपादकीय बोर्ड के आधार पर एक खास कहानी पेश करता नजर आया. डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, आधिकारिक चैनलों के माध्यम से झूठ, प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि के जरिए पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता डीजी आईएसपीआर ने फर्जी कहानी गढ़ने की कोशिश की."
7 मई को 15 लाख से अधिक साइबर हमले हुए
साइबर हमलों के बारे में संदीप शारदा ने कहा कि 7 मई को 7 साइबर हमलों के सिलसिले में 7 APT समूह सक्रिय हुए, जिनमें 15 लाख से अधिक साइबर हमले हुए और पहले ही दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लगभग 3 करोड़ हमले हुए. पाकिस्तान ने फर्जी खबरों को फैलाने के लिए बड़ी संख्या में यूट्यूब चैनल, पूर्व अकाउंट और सरकारी खातों का इस्तेमाल किया. बड़ी संख्या में खातों ने 30 से 40 मिनट के भीतर ही इस तरह की खबरें फैलाईं और भाषा लगभग एक जैसी थी.
#WATCH | Delhi | At the 22nd Subroto Mukherjee Seminar, ADG Strategic Communications Maj Gen Sandeep Sharda says, "During the first day of the Operation Sindoor, you see the biases, the reporting channels, what they want you to see.... Each one of them is putting out a certain… pic.twitter.com/gTZKBKWMUX
— ANI (@ANI) January 21, 2026
फर्जी कहानियों को फैलाने वालों में पाकिस्तान के कई बड़े पत्रकार भी मिले
उन्होंने आगे बताया कि एक ही तरह के 43 थ्रेड्स से 1 लाख से अधिक वीडियो बनाए गए. उन्होंने इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से प्रभाव डालने की कोशिश की. ज्योति मल्होत्रा मामला हम सभी अच्छी तरह जानते हैं. द हिंदू पोस्ट ने वैश्विक मीडिया आउटलेट्स द्वारा पाकिस्तान के अप्रमाणित दावे को फैलाने के 15 मामलों के दस्तावेज प्रकाशित किए. हमने उनके सोर्स का पता लगाया, जो बड़ी संख्या में पाकिस्तानी पत्रकार निकले, जो वहां के विभिन्न मीडिया संस्थानों और एजेंसियों में गहराई से जुड़े हुए थे.
एडीजी बोले- यह सिलसिला आज भी जारी
ADG मेजर जनरल संदीप शारदा ने आगे कहा कि यह सिलसिला आज जारी है. 14 जनवरी को और यहां तक कि आज सुबह भी, एक और छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो सर्कुलेट हो रहा है. पिछले चार महीनों में, एडीजी स्ट्रैटकॉम ने खुद 217 डीपफेक का खुलासा किया है, जिनमें से 164 सेना से, CDS से 9, सेना प्रमुख से 23, वायुसेना प्रमुख से 4 और नौसेना प्रमुख से 3 संबंधित हैं.
सेना प्रमुखों के भाषण के कुछ ही देर बाद बन जाता फर्जी वीडियो
उन्होंने आगे बताया कि आज, जब भी कोई भी प्रमुख किसी मंच पर बोलते हैं, आधे घंटे के भीतर ही, एक पूरी तरह से तैयार किया गया AI-आधारित डीपफेक वीडियो सामने आ जाता है, जिसमें थोड़ा-बहुत बदलाव करके उसे असली जैसा बना दिया जाता है... फिर उसके जरिए गलत जानकारी फैलाई जाती है. जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है.
युद्ध सेवा पदक से सम्मानित हुए थे एडीजी संदीप
मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर के समय एडीजी मेजर जनरल संदीप एस. शारदा उस टीम को लीड कर रहे थे, जिसने त्वरित रूप से सत्यापित जानकारी जारी की, फर्जी बयानों का तुरंत खंडन किया और कई प्लेटफार्मों पर संदेशों का समन्वय किया. उनके इस काम के लिए उन्हें युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है, जो देश का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन विशिष्ट सेवा सम्मान है.
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