कोई भी अपने आशियाने को तैयार करने के लिए बड़े ब्रांड्स की सीमेंट लाता है ताकि दशकों तक उसा घर मजबूत बना रहे. लेकिन कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट तैयार करने के बड़े खेल का खुलासा हुआ है. यह मामला एसीसी और अंबुजा सीमेंट जैसी बड़ी कंपनियों के नाम से नकली सीमेंट बनाने का है. यहां कुछ लोगों ने एक फैक्ट्री ही लगा रखी थी, जहां खराब हुए सीमेंट को नीलामी खरीद लाते थे और उसे पीसकर असली सीमेंट के साथ मिलाकर बोरियों में भर देते थे. फिर अंबुजा और एसीसी नाम के नामी सीमेंट ब्रांड के तौर पर बेच दिया जाता था.
इस मामले में फैक्ट्री संचालक नीरज और धीरज गुप्ता के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा दो और लोगों के नाम इसमें शामिल हैं. जानकारी मिली है कि यहां से बनी सीमेंट को कई अहम प्रोजेक्ट्स में भी खपा दिया गया और इन लोगों ने करोड़ों के वारे न्यारे कर दिए. यह मामला एक तरफ मिलावटखोरी करके नामी कंपनियों के ब्रांड को बदनाम करने का है. वहीं इस नकली सीमेंट का इस्तेमाल करने वाले प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता के साथ भी बड़ा समझौता हुआ है. इस मामले से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है. नीरज और धीरज ने यह खेल भी डिस्ट्रिब्यूटर बनकर किया. ये असली सीमेंट मंगाते थे और उनकी बोरियों से ही माल निकालकर नकली सीमेंट के साथ मिला देते थे. फिर नई बोरियां पैक करके बाजार में उतारी जाती थीं.
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री के संचालक नहीं पाए गए. वे पहले ही वहां से रफूचक्कर हो गए थे. नकली सीमेंट बनाने के प्लान में एसीसी और अंबुजा सीमेंट की हजार से ज्यादा बोरियों का जखीरा लगा हुआ था. माना जा रहा है कि यह माल एक दिन के अंदर ही तैयार किया गया था. साफ है कि दिन भर में ये लोग बाजार में करीब 1 हजार बोरी नकली सीमेंट खपा दिया करते थे. माल को बाजार में खपाने की तैयारी इतनी पुख्ता थी कि मौके पर दो ट्रक खड़े थे और मजदूरों द्वारा उनमें नकली सीमेंट लादा जा रहा था. हालांकि, पुलिस के सायरन की भनक लगते ही फैक्ट्री संचालक और उसके गुर्गे माल वहीं छोड़कर भाग निकले. इस फर्जीवाड़े की भनक कंपनी को काफी समय से लग रही थी. कंपनी के सेल्स सीनियर मैनेजर मुमताज उल हक के अनुसार लगातार शिकायतें आ रही थीं कि पनकी इलाके में उनके प्रतिष्ठित ब्रांड्स के नाम पर नकली सीमेंट धड़ल्ले से बेचा जा रहा है.
इससे न सिर्फ कंपनी की साख पर बट्टा लग रहा था, बल्कि ग्राहकों के घरों की मजबूती भी खतरे में थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कंपनी की विजिलेंस टीम ने गुप्त तरीके से मामले की जांच की. जब नाम बड़े और दर्शन खोटे का यह खेल पूरी तरह से पुख्ता हो गया, तब पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई, जिसके बाद इस सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. छापेमारी के बाद अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ें तलाशने में जुट गई है. पुलिस यह पता लगा रही है कि आखिर नामी कंपनियों की हू-ब-हू बोरियां कहां से छपकर आ रही थीं? बोरियों के अंदर भरा जाने वाला घटिया या नकली सीमेंट कहां तैयार हो रहा था? और सबसे बड़ा सवाल- अब तक शहर के किन-किन इलाकों में और किन डीलरों को यह नकली माल सप्लाई किया जा चुका है?

इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए एडीसीपी योगेश कुमार ने बताया कि एसीसी कंपनी के प्रतिनिधि मुमताज उल हक की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है. मौके से भारी मात्रा में भरी हुई और खाली बोरियां बरामद हुई हैं. कंपनी की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है और उनके पकड़े जाने के बाद ही इस काले कारोबार के पूरे सिंडिकेट का खुलासा हो सकेगा.
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