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जम्मू-कश्मीर में बचे हैं 52 विदेशी आतंकवादी, ये हैं मोस्ट वांटेड 10

नार्थ कश्मीर के बारामुला जिले में सबसे ज़्यादा विदेशी आतंकी मारे गए.य 9 मुठभेड़ों में 14 आतंकी मारे गए. जम्मू क्षेत्र में भी लगभग 40 आतंकियों में से 35-36 विदेशी थे. इस बदलाव की वजह से स्थानीय भर्ती में भारी गिरावट आई है.

जम्मू-कश्मीर में बचे हैं 52 विदेशी आतंकवादी, ये हैं मोस्ट वांटेड 10
  • जम्मू कश्मीर में विदेशी आतंकियों की संख्या 2019 के 400 से घटकर 2024 में मात्र 52 रह गई है.
  • सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाइयों से स्थानीय आतंकियों की संख्या भी दस से कम हो चुकी है.
  • विदेशी आतंकवादी मुख्यतः पाकिस्तान से घुसपैठ कर आते हैं और ISI की मदद से सक्रिय होते हैं.

साल 2026 में घाटी में मौजूद विदेशी आतंकियो खात्मा होगा. जम्मू कश्मीर में मौजूद FT यानी फ़ोरेन टेररिस्ट टारगेट पर. जम्मू कश्मीर में अब FT मॉड्यूल के आतंकियों की से संख्या में कमी. 2019 में जहां जम्मू कश्मीर में 400 से ज्यादा विदेशी आतंकी थे. अब विदेशी आतंकियों की संख्या केवल 52 रह गई है. जबकि जम्मू कश्मीर में करीब 10 के करीब लोकल आतंकी बचे हैं. यानि सुरक्षाबलों की करवाई का असर साफ देखने को मिल रहा है.

पिछले कुछ सालों से सुरक्षा बल लगातार बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं ,जिसके चलते विदेशी आतंकियों के साथ साथ लोकल आतंकियों भी कम हुए है. एजेंसियों के मुताबिक विदेशी आतंकियों का मॉड्यूल ISI की मदद से सक्रिय है. FT मॉड्यूल के लोकल नेटवर्क को भी क्रैक डाउन करने में जुटी सुरक्षा एजेंसियां 2024 में कुल 68 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 42 विदेशी थे. ज्यादातर आतंकी FT हैं, यानी पाकिस्तान से घुसपैठ कर घाटी आए हैं. ये आतंकवादी या तो नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ के दौरान मारे गए या फिर कश्मीर के अंदर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में ढेर हुए.

नार्थ कश्मीर के बारामुला जिले में सबसे ज़्यादा विदेशी आतंकी मारे गए.य 9 मुठभेड़ों में 14 आतंकी मारे गए. जम्मू क्षेत्र में भी लगभग 40 आतंकियों में से 35-36 विदेशी थे. इस बदलाव की वजह से स्थानीय भर्ती में भारी गिरावट आई है.

  • 2021 में 125 स्थानीय युवक आतंकवादी बने
  • 2022 में 100 स्थानीय युवक आतंकवादी बने
  • 2023 में यह संख्या घटकर 22 रह गई और 2024 में सिर्फ़ 7 युवक आतंकवादी बने
  • अब तो हालत यह है कि कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या 10 से भी कम रह गई है

पाकिस्तान ने इसी कमी को पूरा करने के लिए अपने ट्रेंड किए गए आतंकी भेजने शुरू किए हैं. इसमें हिजबुल मुजाहिद्दीन लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और उनके अन्य विंग जैसे TRF (द रेसिस्टेंस फ्रंट), PAFF (पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट), और कश्मीर टाइगर्स जैसे संगठन शामिल हैं. लेकिन अब सुरक्षा बलों ने इन विदेशी यानि पाकिस्तानी मॉड्यूल के आतंकियों की कमर तोड़ दी है और अब विदेशी आतंकियों की से संख्या भी घटकर केवल 52 रह गई है.

इन विदेशी आतंकियों में कौन है टॉप टेन आतंकी

  1. जाकिर उर्फ कासिम उर्फ वलीद ,ये लश्कर ए तैयबा का कमांडर है,गांदरबल के आसपास ऑपरेट करता है,सितंबर 2020 से एक्टिव है,इसकी केटेगरी A++ है.
  2. एजाज उर्फ अबु हुरैरा उर्फ पिकल उर्फ छोटा हफीज,ये लश्कर ए तैयबा का आतंकी है,श्रीनगर के आसपास ऑपरेट करता है. मई 2021 से एक्टिव है,इसकी कैटरगेरी A++ है.
  3. उमेर भाई उर्फ अबु तल्हा उर्फ उर्फ इस्माइल उर्फ तल्हा उर्फ कारी ,ये लश्कर ए तैयबा का आतंकी है. ये जुलाई 2021 से एक्टिव है. श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट करता है,इसकी कैटेगरी A+ है.
  4. छोटा फ़ैदुल्लाह उर्फ अली भाई उर्फ अयाज उर्फ अबु अली ,लश्कर ए तैयबा का आतंकी है. 2017 से एक्टिव है. श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट कर रहा है. इसकी कैटेगरी A++ है.
  5. गाजी उर्फ पठान ,लश्कर ए तैयबा का आतंकी है. 2016 से एक्टिव है. बडगाम के आसपास ऑपरेट करता है. इसकी कैटेगरी A++ है
  6. अबु तालिब,लश्कर ए तैयबा का आतंकी है,2024 से एक्टिव है,नोगाम के आसपास एक्टिव,A केटेगरी का आतंकी है
  7. दुजाना उर्फ रिज़वान, लश्कर ए तैयबा का आतंकी, सितम्बर 2020 से एक्टिव,गांदरबल से ऑपरेट करता है. इसकी कैटेगरी A है 
  8. बाबर,लश्कर ए तैयबा का आतंकी,2022 से एक्टिव,गांदरबल से ऑपरेट करता है,इसकी केटेगरी A है
  9. तालिब ,लश्कर ए तैयबा का आतंकी, 2024 से एक्टिव, श्रीनगर के आसपास से एक्टिव, इसकी केटेगरी A है
  10. हमस भाई, लश्कर ए तैयबा का आतंकी, जून 2023 से एक्टिव, श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट करता है. इसकी केटेगरी A है

इसके अलावा जैश ए मोहम्मद, और बाकी पाकिस्तानी आतंकी संगठन के भी कई आतंकी है. समय समय पर इन आतंकियो के छिपे होने की लोकेशन भी सुरक्षा एजेंसियों को मिलती रहती है और उसके बाद इनको पकड़ने के लिए ऑपरेशन भी चलाए जाते है. कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, उरी, अनंतनाग, शोपियांन, बड़गाम, बांदीपोरा, गुलमर्ग, बारहमुला और साउथ कश्मीर के कई ऐसे जंगली और पहाड़ी इलाके है जंहा इन आतंकियो के छिपे होने की खबर सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी. लेकिन जब इनको तलाशने के लिए ओपरेशन चलाया गया तो ये जंगली रास्ते का फायदा उठा कर फरार हो गए.

OGW का बड़ा नेटवर्क इन आतंकियो की मदद करता है. अपने घरों में छिपाने से लेकर इन आतंकियो को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने, इन्हें खाने पीने और लॉजिस्टिक मुहैया कराने का काम OGW का नेटवर्क करता है. NDTV के पास 2025 में इन आतंकियो के जिन जिन लोकेशन पर देखा गया था वो प्रोबेबल लोकेशन भी है. लेकिन सुरक्षा कारणों से हम उसे दिखा नहीं सकते है.

लेखक के बारे में
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आलोक कुमार ठाकुर
Senior Sub Editor
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