झारखंड के धनबाद स्थित BCCL में नौकरी लगाने के नाम पर शातिर ठगों का बड़ा रैकेट फैला हुआ था, जिसने 200 से भी अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया था. आरोपियों ने करीब 20 करोड़ की ठगी की. हैरानी की बात यह है कि ठगों के जाल में महिला कांग्रेस नेता भी फंस गई और 24 लाख रुपये गंवा दिए. इस शातिर गिरोह ने डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग और बड़कागांव समेत कई क्षेत्रों में अपना जाल फैलाकर लगभग 200 बेरोजगार युवाओं से करीब 20 करोड़ रुपए की ठगी कर ली है. ठगी का यह जाल इस तरह से बुना गया था कि इसका शिकार बना हर व्यक्ति अब खुद भी अनजाने में इस अपराध का एक हिस्सा बना था. क्योंकि यह सारा खेल नेटवर्किंग के जरिए चल रहा था.
कांग्रेस महिला नेता ने दर्ज कराई थी शिकायत
इस महा घोटाले का खुलासा तब हुआ जब डकरा की रहने वाली कांग्रेस नेता इंदिरा देवी ने बीती 12 मई को खलारी थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. इंदिरा देवी के अनुसार, उन्होंने अपने दो बेटों मनीष कुमार और कुणाल कुमार और भतीजे कौशल प्रसाद को बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर 24 लाख रुपए गंवा दिए हैं. शिकायत के मुताबिक, चूरी उत्तरी की पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने उन्हें सबसे पहले इस ‘सेटिंग' के बारे में बताया था. मीनाक्षी ने दावा किया था कि उसकी दो बेटियां (साक्षी और श्रेया) बीसीसीएल में नौकरी कर रही हैं. उसने बताया कि यह नौकरी केडी खलारी निवासी और पिपरवार के अशोका में कार्यरत सीसीएल कर्मी अजय कुमार सिन्हा और पवन कुमार ने लगवाई है.
फर्जी ज्वाइनिंग लेटर दिखाकर जीता भरोसा
जब इंदिरा देवी की मुलाकात पवन कुमार से हुई, तो उसने खुद को सेटिंग के जरिए बीसीसीएल में कार्यरत बताया और बकायदा एक ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाया. पवन डकरा विश्वकर्मा मोड़ के एक रसूखदार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसके कारण इंदिरा देवी ने उस पर आसानी से भरोसा कर लिया.
चेक देते हुए खिंचवाई फोटो फिर खाते में डलवाए लाखों रुपए
भरोसा होने पर इंदिरा देवी ने पवन, अजय और मीनाक्षी को एक चेक सौंपा और सबूत के तौर पर उसकी फोटो भी खिंचवा ली (जिसमें मीनाक्षी छुपने की कोशिश कर रही थी). हालांकि, बाद में कुछ तकनीकी कारणों से उस चेक से पैसे नहीं निकल सके. इसके बाद आरोपियों के कहने पर इंदिरा देवी ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी (रॉयल पार्क अपार्टमेंट) निवासी सागर चक्रवर्ती के ‘शानवी एंटरप्राइजेज' नामक बैंक खाते में 24 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए. रकम भेजने के बाद एक बॉन्ड पेपर भी तैयार किया गया, जिस पर सभी आरोपियों के हस्ताक्षर हैं.
फर्जी मेडिकल, बायोमेट्रिक और ट्रेनिंग का नाटक
ठगी को असली रूप देने के लिए गिरोह ने पीड़ितों को धनबाद बुलाया. इंदिरा देवी के तीनों बच्चों को धनबाद के एक होटल में ठहराया गया. इसके बाद धनबाद पीएमसीएच में रवि राय और मुकेश महतो नामक युवकों द्वारा बच्चों की मेडिकल जांच कराई गई. वहां पहले से ही कई अन्य राज्यों और जिलों के बच्चों की जांच चल रही थी, जिससे पूरा मामला असली लगे. दोबारा धनबाद बुलाकर लोदना एरिया के एक रेलवे साइडिंग पर ले जाया गया. वहां अनुप सरकार, विशाल सिंह और रवि राय द्वारा बच्चों के बायोमेट्रिक हस्ताक्षर कराए गए और बीटीसी ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी करने का ढोंग रचा गया. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्वाइनिंग लेटर तो नहीं दिया गया, लेकिन लगभग 200 बच्चों की एक सूची दिखाई गई, जिसमें अलग-अलग एरिया में पोस्टिंग दिखाई गई थी. इस सूची में इंदिरा देवी के बच्चों के नाम भी शामिल थे. इसके बाद आरोपियों ने बातचीत बंद कर दी और फोन उठाना भी छोड़ दिया.
मल्टी-लेवल मार्केटिंग की तरह काम कर रहा था गिरोह
पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह का संचालन पूरी तरह से किसी नेटवर्किंग या मल्टी-लेवल मार्केटिंग की तरह किया जा रहा था, जिसके कई चैनल बने हुए थे. सागर चक्रवर्ती द्वारा संचालित चैनल, जो ‘शानवी एंटरप्राइजेज' के खाते में पैसे मंगवाता था. वह खुद को टीएमसी का नेता बताता है. मुस्तकीम अंसारी द्वारा संचालित चैनल, जो धनबाद के एक टायर दुकान के बैंक खाते में पैसे लेता था. मुस्तकीम धनबाद के सिजुआ का रहने वाला है और खुद को कांग्रेस पार्टी व ट्रेड यूनियन का नेता बताता है.
गिरोह ने पहले कुछ लोगों से नौकरी के नाम पर पैसे लिए. बाद में उन्हें झांसा दिया गया कि अगर वे अन्य कैंडिडेट ढूंढकर लाएंगे, तो उनका काम बिना पैसों के (फ्री में) कर दिया जाएगा. इस कमीशन और लालच के चक्कर में लोगों ने अंधाधुंध अपने रिश्तेदारों और परिचितों को इस दलदल में फंसा दिया. कई लोगों ने कैंडिडेट से अपने खाते में पैसे लिए और ऊपर बैठे मुख्य सरगनाओं को कैश में भुगतान कर दिया.
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