- सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस ने मेहुल चोकसी, चंदा कोचर सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
- जांच में पता चला कि मेहुल चोकसी की कंपनियों ने विभिन्न बैंकों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया.
- ठगी के लिए बैंक अधिकारियों की मदद से कर्ज लिया गया और शेल कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी की गई.
देश के सबसे बड़े बैंक घोटालों में से एक को लेकर अब एक कार्रवाई सामने आई है. सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी, उसकी पत्नी प्रीति चोकसी, ICICI बैंक की पूर्व MD-CEO चंदा कोचर, बैंक के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एनएस कन्नन, PNB के पूर्व अधिकारियों और कई अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है.
SFIO ने ये चार्जशीट मुंबई की एक अदालत में पिछले महीने दाखिल की थी. जांच में सामने आया है कि मेहुल चोकसी की कंपनियों ने अलग-अलग बैंकों को कुल 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया.
इस तरह करोड़ोंं की ठगी को दिया अंजाम
SFIO ने अपनी चार्जशीट में पूरा फाइनेंशियल खेल विस्तार से बताया है कि कैसे बैंक अधिकारियों की मदद से कर्ज लिया गया और कैसे शेल कंपनियों के जरिए से पैसा इधर-उधर घुमाया गया और आखिरकार कैसे चोकसी देश छोड़कर भाग निकला. मेहुल चोकसी 2017 में भारत से फरार हो गया था.
इस मामले में जिन कंपनियों की जांच हुई है, उनमें ये हैं शामिल -
- गीतांजलि जेम्स
- अस्मी ज्वेलरी
- गिली इंडिया
- नक्षत्र ब्रांड्स
- डीडामास (अब बेजेल ज्वेलरी)
- और हॉन्गकॉन्ग स्थित कई विदेशी कंपनियां शामिल हैं.
इन बैकों से करोड़ों की ठगी को दिया अंजाम
जांच के मुताबिक, PNB से 6,097 करोड़ रुपये की ठगी की गई है. साथ ही ICICI बैंक की अगुवाई वाले 28 बैंकों से 5,564 करोड़ रुपये, PNB के नेतृत्व वाले 9 बैंकों से 807 करोड़ रुपये और गिली इंडिया के जरिए 375 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई.
इस पूरे मामले में PNB के पूर्व अधिकारी गोकुलनाथ शेट्टी, बेचू तिवारी, यशवंत जोशी और प्रफुल सावंत के नाम भी शिकायत में शामिल हैं.
बेल्जियम की जेल में बंद है मेहुल चोकसी
मेहुल चोकसी इस समय बेल्जियम के एंटवर्प शहर की जेल में बंद हैं. भारत के कहने पर उसकी गिरफ्तारी हुई थी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में है. अब तक बेल्जियम की अदालतों से उसे कोई राहत नहीं मिली है.
सूत्रों के मुताबिक SFIO अधिकारियों ने इस केस में बैंक अफसरों की भूमिका, फर्जी कंपनियां, विदेशी लिंक और पैसों की हेराफेरी हर एंगल से जांच की गई है. यह केस अब प्रत्यर्पण प्रक्रिया में भी भारत की स्थिति मजबूत कर सकता है.
अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 अप्रैल को मुंबई की अदालत में होगी.
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