तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के याचरम गांव में करीब 100 आवारा कुत्तों को जहर देकर मारने के आरोप में राचाकोंडा पुलिस ने मामला दर्ज किया है. FIR के अनुसार घटना 19 जनवरी सुबह 9 बजे हुई, जबकि सूचना 20 जनवरी दोपहर 1 बजे पुलिस तक पहुंची. मामला BNS की धारा 325 r/w 3(5) और Prevention of Cruelty to Animals Act की धारा 11(1)(a)(i) के तहत दर्ज किया गया है.
शिकायत मुड़ावत प्रीति (22), जो नागरकुर्नूल की एक ऐनिमल क्रुएल्टी प्रिवेंशन असिस्टेंट हैं, ने दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के सरपंच, एक वार्ड सदस्य, गांव सचिव और अन्य लोगों ने मिलकर कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन लगवाए.
कॉल रिकॉर्ड और बयानों से खुलासा
शिकायत में दावा किया गया कि एक कॉल में वार्ड सदस्य ने कहा कि कुत्तों को 'शिफ्ट' किया गया, जबकि दूसरी कॉल में उसने स्वीकार किया कि कुत्तों को एनेस्थीसिया इंजेक्शन दिए गए. स्थानीय लोगों ने भी पुष्टि की कि इंजेक्शन देने के बाद कुत्ते मर गए.
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पुलिस के मुताबिक घटना पुलिस स्टेशन से महज़ 1 किमी के दायरे में हुई. सब‑इंस्पेक्टर उय्याला मधु ने मामले की जांच शुरू होने की पुष्टि की. अभी तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है.
कुछ दिन पहले भी बड़े पैमाने पर कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था
तेलंगाना में हाल ही में ग्राम पंचायत चुनावी वादों को पूरा करने के नाम पर सैकड़ों कुत्तों को जहर देकर मारने का मामला सामने आया था. पुलिस ने हनमकोंडा और कामारेड्डी जिलों में 7 सरपंचों सहित 15 लोगों पर FIR दर्ज की थी. शुरुआती जांच में पता चला कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 500 कुत्तों की हत्या की गई.
क्या है विवाद की जड़?
स्थानीय पंचायत चुनावों में कई उम्मीदवारों ने वादा किया था कि वे 'कुत्ता‑मुक्त गांव' बनाएंगे. चुनाव जीतने के बाद कथित रूप से इस वादे को पूरा करने के लिए व्यवस्थित रूप से आवारा कुत्तों को जहर देकर मारने की योजना बनाई गई. शायमपेट, अरेपल्ली और पलवांचा क्षेत्रों से 110 कुत्तों के शव बरामद हुए.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण 'अज्ञात टॉक्सिन' बताया गया.
कौन-कौन आरोपी?
500 कुत्तों को जहर देने के मामले में 7 सरपंच, जिन्होंने कथित रूप से कुत्तों को मारने की अनुमति दी. ग्राम पंचायत सचिव व स्टाफ- जिन्होंने रसद, डॉग‑कैचर्स आदि की व्यवस्था की. 3 निजी कॉन्ट्रैक्टर- जिन्हें जहर और इंजेक्शन से कुत्तों को मारने के लिए नियुक्त किया गया.
पशु अधिकार संगठनों की चिंता बढ़ी
दोनों घटनाओं ने तेलंगाना में पशु संरक्षण, ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली, और एंटी‑क्रुएल्टी कानूनों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ऐनिमल वेलफेयर समूहों ने सरकार और पुलिस से कड़ी कार्रवाई और सख्त निगरानी व्यवस्था की मांग की है.
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