कोरोनावायरस का हर वेरिएंट सबसे पहले महाराष्‍ट्र में क्‍यों दिख रहा, विशेषज्ञों ने बताई वजह..

15 मई के बाद महाराष्ट्र ने कुल 7,500 सैम्पल जीनोम सीक्वन्सिंग के लिए भेजे और राज्‍य के इन्हीं सैम्पल से 21 ‘डेल्टा प्लस’ वेरिएंट मामलों की अभी पहचान हुई है.

कोरोनावायरस का हर वेरिएंट सबसे पहले महाराष्‍ट्र में क्‍यों दिख रहा, विशेषज्ञों ने बताई वजह..

पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र में डेल्टा वेरिएंट का पहला मामला सामने आया था (प्रतीकात्‍मक फोटो)

खास बातें

  • विदेशी यात्री, समुद्री कारोबार, मौसम, घनत्व जैसे कई फ़ैक्टर
  • हर ज़िले से 100 नमूने जीनोम सीक्वन्सिंग के लिए भेजे जा रहे
  • डेल्टा वेरिएंट भी सबसे पहले महाराष्ट्र से ही निकला
मुंंबई:

महाराष्ट्र कोविड वायरस के म्यूटेशन का केंद्र आखिर क्‍यों बना हुआ है? आखिर यहीं हर वेरिएंट सबसे पहले क्‍यों दिखते हैं? कोरोनावायरस का डेल्टा वेरिएंट यहीं मिला, जिसके कारण दूसरी लहर आई. अब ‘डेल्टा प्लस' ने हाईअलर्ट पर रखा है. लंबे समय से बीमार और बड़ी संख्या में मरीज़ म्यूटेशन की वजह बनते हैं. विदेशी यात्री, समुद्री कारोबार, मौसम, घनत्व जैसे कई फ़ैक्टर को भी विशेषज्ञ इसका कारण मानते हैं. पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र में डेल्टा वेरिएंट B.1.617.2 का पहला मामला सामने आया था. दूसरी लहर के लिए इसे ही जिम्मेदार माना जाता है. म्यूटेशन पर अध्ययन के लिए नवंबर 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच 733 सैंपल इकट्ठा किए गए थे, इसके बाद जीनोम सीक्वेंसिंग की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें पाया गया कि वायरस 47 बार म्यूटेट हो चुका है.

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15 मई के बाद महाराष्ट्र ने कुल 7,500 सैम्पल जीनोम सीक्वन्सिंग के लिए भेजे और राज्‍य के इन्हीं सैम्पल से 21 ‘डेल्टा प्लस' वेरिएंट मामलों की अभी पहचान हुई है. देखते ही देखते डेल्टा प्लस ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न' बन चुका है. डेल्टा प्लस के भी दो वेरिएंट बताए जा रहे हैं जिसे AY.1 और AY.2 नाम दिया गया है.महाराष्ट्र और मुंबई कोविड टास्क फ़ोर्स इसके अलग-अलग कारण समझने की कोशिश कर रही हैं. टास्क फ़ोर्स के मुताबिक़, महाराष्ट्र एकमात्र स्टेट है जो अपने 36 जिलों में से प्रत्येक से लगभग 100 नमूने जीनोम सीक्वन्सिंग के लिए भेज रहा है, इसलिए म्यूटेशन की पहचान आसान होती है. फ़िलहाल 1,21,859 एक्टिव केस देख रहे महाराष्ट्र में मरीज़ों की संख्या शुरुआत से ही ज़्यादा रही है, लंबे वक़्त तक मरीज़ों में वायरस की मौजूदगी भी म्यूटेशन में मदद करती है. भारी संख्या में और लगातार विदेशी यात्रियों की आवाजाही ,तटीय राज्य होने के कारण जारी समुद्री कारोबार, जनसंख्या घनत्व और मौसम जैसे अलग-अलग फ़ैक्टर भी इसके कारण हो सकते हैं.

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स्टेट टास्क फ़ोर्स के सद्रस्‍य डॉ राहुल पंडित कहते हैं, ' महाराष्ट्र इंडस्ट्रीयल स्टेट है, प्रगतिशील राज्य है. इसी  तरह मुंबई फ़ाइनेंसियल कैपिटल है. स्वाभाविक है कि दूसरी जगहों से यहाँ लोगों का आना-जाना लगा रहता है. इस वजह से स्ट्रेन में म्यूटेशन हो सकते हैं  हमारे पास संक्रमितों की संख्या थोड़ी ज़्यादा होती है जिसमें वायरस को म्यूटेशन को मौक़ा मिलता होगा. महाराष्ट्र हर महीने हर ज़िले से 100 सैम्पल जीनोम सीक्वन्सिंग के लिए ले रहा है इस वजह से हम डेल्टा प्लस को पकड़ पाए.' राज्‍य सरकार के कई बड़े स्वास्थ्य प्रोजेक्ट से जुड़े रहे वैज्ञानिक डॉ सुरेश चंद्र सिंह और बीएमसी कोविड टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ गौतम भंसाली ने समुद्री कारोबार, नमी भरे मौसम जैसे कई फ़ैक्टर को म्यूटेशन का कारण माना है. उन्‍होंने कहा, 'पहली, दूसरी सारी लहर महाराष्ट्र और केरल से शुरू हुई है. मुख्य कारण जो मुझे समझ आ रहा है वो पोर्ट ऑफ़ एंट्री, समंदर रूट समझ आता है. महाराष्ट्र, केरल, गुजरात ये तटीय राज्य हैं इसलिए केस की शुरुआत भी हम यहां से देखते हैं. तीसरी वेव भी लग रहा है कि महाराष्ट्र और केरल में सबसे पहले आएगी. मौसम भी फ़ैक्टर है. बारिश पहले केरल फिर महाराष्ट्र तो वैसे ही संक्रमण का ट्रेंड भी कुछ इस प्रकार दिखता है.'  


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वैज्ञानिक डॉ सुरेश चंद्र सिंह बताते हैं, 'हवाई रूट, जनसंख्या घनत्व, सी रूट से ज़्यादातर सारे गुड्स सप्लाई होते हैं, इसके अलावा मिडिल ईस्ट से हमारा कनेक्शन मुंबई के ज़रिए है. सबसे पहले डिटेक्ट हुए मामले तक अगर आप जाएंगे तो दुबई से ही कनेक्शन था, तो कुछ ऐसे फ़ैक्टर्ज़ हैं जो मुंबई, महाराष्ट्र से शुरुआत की कड़ी जोड़ते हैं.' बहरहाल, म्यूटेशन के कारणों की पड़ताल जारी है. तीसरी लहर की तारीख़ तय नहीं है लेकिन आशंका बनी हुई है. हमारे वॉरियर्स इससे भिड़ने के लिए तैयार हैं. इस आस और उम्मीद के साथ कि तब तक ज़्यादा से ज़्यादा लोग वैक्‍सीनेट हो जाएं.