Bengal Elections: ममता बनर्जी नंदीग्राम से लड़ेंगी विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच सियासी जंग तेज होती जा रही है. इस बीच, टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने बड़ा ऐलान किया है. ममता ने मई में होने वाले विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम (Nandigram) से लड़ने का सोमवार को ऐलान किया. यह घोषणा काफी अहम है क्योंकि नंदीग्राम को टीएमसी के बागी नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) का गढ़ माना जाता है, जो हाल में टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो गए.
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "मैं नंदीग्राम से लडूंगी. नंदीग्राम मेरे लिए भाग्यशाली जगह (Lucky Place) है." पिछला चुनाव ममता बनर्जी ने कोलकाता की भवानीपुर सीट से लड़ा था.
वहीं कभी तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले और अब बीजेपी में शामिल हो चुके सुवेंदु अधिकारी ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वो 50 हजार से कम वोटों से ममता बनर्जी को नहीं हरा पाए तो राजनीति छोड़ देंगे.
66 वर्षीय मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि वह दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ सकती हैं और कहा "नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है, भवानीपुर मेरी छोटी बहन है... अगर संभव हुआ तो मैं दोनों जगह से चुनाव लड़ूंगी. यदि मैं किसी कारणवश भवानीपुर से चुनाव नही लड़ पाई तो कोई और चुनाव लड़ेगा."
नंदीग्राम में किसानों की जमीन को लेकर चलाए गए ममता बनर्जी के अभियान ने 2011 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सत्ता में आने में काफी मदद की. उन्होंने वाम दलों को करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी. साल 2007 में नंदीग्राम में सेज परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन में 14 लोगों की मौत हो गई थी. लेफ्ट सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी. इसके बाद के चुनाव में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने "मां, माटी, मानुष" अभियान चलाया था.
ममता बनर्जी का नंदीग्राम लौटना सुवेंदु अधिकारी के लिए सीधी चुनौती है, जिन्होंने दिसंबर महीने में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक मेगा रैली में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था.
सुवेंदु अधिकारी की नंदीग्राम में पैठ ने ही उन्हें तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में पहुंचा दिया. ममता बनर्जी के करीबी रहे अधिकारी ने 2007 में नंदीग्राम से लेफ्ट को उखाड़ फेंका और तृणमूल को यहा की सियासत में काबिज किया. आगामी विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की सियासी जंग ममता बनर्जी के लिए काफी निर्णायक होगी क्योंकि उनकी सीधी टक्कर अपने पुराने भरोसेमंद साथी से होगी.
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