PM नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में टीकाकरण का हाल, पहली डोज में अभी 71% बाकी

वाराणसी की टोटल पॉपुलेशन 42 लाख के आसपास है लेकिन इसमें जिन लोगों को वैक्सीन लगना है वोटर लिस्ट के मुताबिक यानि 18 साल से ऊपर के लोग जिनको वैक्सीन लगनी है उनकी जनसंख्या है  लगभग 29 लाख.

PM नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में टीकाकरण का हाल, पहली डोज में अभी 71% बाकी

वाराणसी में 16 जुलाई तक 10,44,765 लोगों का टीकाकरण हुआ. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वाराणसी:

15 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  कोविड की दूसरी लहार के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे.  कोविड की दूसरी लहार में वाराणसी पूरी तरह बेबस और बेहाल नज़र आई, उसके शमशान घाट भी कोविड से हो रही मौतों को देख कर सहम गई थी. व्यवस्थाएं चरमरा गई थी अस्पताल में डॉक्टर ऑक्सीजन हर चीज के लिए लोग इधर-उधर भटक रहे थे . नगर निगम का जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन विभाग भी कभी इतने लोगों का मृत्यु सर्टिफिकेट नहीं बनाया था. लेकिन 8 महीने बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र आए तो उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को कोविड से बेहतरीन ढंग से निपटने के लिए न सिर्फ शाबाशी दी, बल्कि उत्तर प्रदेश में टीकाकरण यानी वैक्सीनेशन को भी सबसे बड़ा वैक्सीनेशन मुहिम बताया. उनके अपने संसदीय क्षेत्र में वैक्सीनेशन का क्या हाल है वह आप इन आंकड़ों के जरिए समझ सकते हैं .

कोविड-19 के कारण बच्चों के टीकाकरण पर असर पड़ने की खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं : सरकार

वाराणसी की टोटल पॉपुलेशन 42 लाख के आसपास है लेकिन इसमें जिन लोगों को वैक्सीन लगना है वोटर लिस्ट के मुताबिक यानि 18 साल से ऊपर के लोग जिनको वैक्सीन लगनी है उनकी जनसंख्या है  लगभग 29 लाख. वाराणसी में 16 जनवरी से 16 जुलाई की शाम 5:00 बजे तक कोविड वैक्सीन का आंकड़ा बताता है कि 10,44,765 लोगो को पहली और दूसरी डोज मिलाकर कुल वैक्सीनेशन हुआ है. 

अगर इसको पहली और दूसरी डोज में बांट कर देखे तो पहली डोज 8,41,379 लोगो को लगी है जबकि दूसरी डोज लगी  2,033,86 लोगो को . अब इसमे अगर उम्र के हिसाब से देखे तो 18 से 45 वर्ष के ग्रुप में 5,08,353 लोगों को ,  45 से 60 वर्ष के ग्रुप में 3,26,079 लोगो को और 60 वर्ष से ऊपर लोगो को 2,10,333 वैक्सीन लगी . इसमे पुरुष और महिलाओँ का भी एक  आंकड़ा देखना बहुत जरूरी है क्योंकि महिलाएं पीछे रह जाती है . तो कुल लगे वैक्सीन में पुरषों को 6,17,339 जबकि महिलाओ को 4,27,145 वही 281 किन्नरों को भी वैक्सीन लगी है . 

वैक्सीन लगने के इन आंकड़ों को अगर प्रतिशत में देखें तो पहली और दूसरी डोज को मिलाकर वैक्सीन लगने के पात्र जनसंख्या में अब तक 36% लोगों को वैक्सीन लगी है , जबकि 64% को अभी वैक्सीन लगनी है . अब इसको अगर पहली डोज और दूसरी डोज के हिसाब से देखते है तो पहली डोज में 29% लोगों को वैक्सीन लग गया है और 71% बाकी है . जिन लोगों को पहली डोज लग गई है उन्हें दूसरी डोज लगनी है उनमें अगर प्रतिशत देखें तो दूसरी डोज में अभी सिर्फ 24% लोगो को लगा है यानि 76% लोग बाकी है . हालांकि इसमें उन लोगों की भी संख्या है जिन लोगों को पहला डोज लगने के बाद तय समय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है इसलिए इस आंकड़े को उसके मुताबिक देखना चाहिए . 

वैक्सीन लगने के दर को अगर महीने के हिसाब से देखें तो पहली लहर के बाद  जनवरी महीने में 7923, फरवरी महीने में 39662 , मार्च महीने में 110929 लोगों को टीके लगें थे  यह वह महीने भी थे जब लोग वैक्सीन  नहीं भी लगा रहे थे  और बच भी रहे थे  लेकिन अप्रैल महीने से दूसरी लहर तेजी से आई और वैक्सीनेशन की आवाज भी तेज उठी तो वाराणसी में भी वैक्सीन लगने की दर बढ़ी .  अप्रैल महीने में 150597, मई महीने में 220545 और जून के आखिरी महीने तक 311346 लोगों को वैक्सीन लग गई . 

इन वैक्सीन को लगाने के लिए बनारस में शुरू में जैसे-जैसे टीके की आमदा होती गई वैसे वैसे सेंटर बढ़ा कर टीकाकरण किया गया . इसमें  दोनों वैक्सीन के हिसाब से अलग-अलग अलग कैम्प  और 18 साल के  उम्र के हिसाब से अलग कैम्प शामिल है यानी कुल 632 टीकाकरण केंद्र बनाए गए. इनमें वह भी शामिल थे जैसे बहुत सी सामाजिक संस्थाएं, जिला कचहरी , पत्रकार , व्यापार मंडल के डिमांड के मुताबिक उनकी उनकी जगहों पर कैंप लगाकर लगाया गया. 

वैसे बनारस में स्थाई तौर पर शहर में 30 और देहात में भी 30 टीकाकरण सेंटर है. सरकारी आंकड़ों के लेखा-जोखा में इन टीकाकरण को सत्र के हिसाब से देखा जाता है तो उसके मुताबिक बनारस में अब तक 11016 सत्र चलें एक सत्र में तकरीबन 200 डोज लगाया जाता है. हालांकि संख्या कम होने पर कहीं-कहीं यह 50 से 100 के बीच भी रहती है . 

दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लोग 'डेल्टा वैरिएंट' के शिकार, वैक्सीन की दोनों डोज लेने से घटी मौत की गुंजाइश: स्टडी

टीकाकरण के इन 10, 44 ,765 डोज में  अगर वैक्सीन को देखें तो कोविशील्ड लगी 8,66,646जबकि कोवैक्सीन लगी 1,78,119. इन वैक्सीन के वेस्टेज होोने परसेंटेज काफी कम था कोवैक्सिन 0.23 ,कोविशील्ड 0.25 प्रतिशत ही खराब हुई. वर्तमान समय में अभी 15000 टीके  प्रतिदिन लग रहे हैं हालांकि वैक्सीन के उपलब्धता के अनुसार यह घटते बढ़ते रहते हैं लेकिन अगर 15000 भी मान ले  और 29 लाख में से 10 लाख 44 हजार टीके को घटा दें तो  अभी तकरीबन साढे 4 महीना लग जाएगा अगर सेकंड डोज को जोड़ दिया जाए तो यह दिन और बढ़ जाएंगे.


गुजरात को PM मोदी की सौगात, कई परियोजनाओं का किया उद्घाटन

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com