
सूचना के अधिकार कानून यानी आरटीआई से मिली जानकारी बताती है कि एम्स में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले अफसर संजीव चतुर्वेदी को प्रताड़ित करने का सिलसिला जारी है। केंद्र सरकार ने न तो उन्हें कोई काम दिया है, न ही उनका तबादला दिल्ली सरकार में किया जा रहा है, जैसा कि आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मांग है।
आरटीआई से मिली जानकारी बताती है कि चतुर्वेदी के दिल्ली सरकार में तबादले की फाइल लंबे वक्त से खुद मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के पास है और उस पर कुछ नहीं हो रहा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संजीव चतुर्वेदी को पिछली 16 फरवरी को बतौर ओएसडी मांगा, लेकिन पांच हफ्ते से अधिक वक्त बीच जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने चतुर्वेदी को रिलीव नहीं किया है।
1 मार्च को खुद केजरीवाल ने मीडिया में बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था, "चतुर्वेदी ने एम्स में भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर किए हैं। हम दिल्ली सरकार में उनके अनुभव का इस्तेमाल करने के लिए उन्हें मांग रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार न तो चतुर्वेदी का इस्तेमाल खुद कर रही है और न ही हमें उन्हें दे रही है। बस उन्हें साइडलाइन करके रखा हुआ है।"
एनडीटीवी इंडिया के पास जो दस्तावेज़ हैं, वे बताते हैं कि चतुर्वेदी की फाइल पिछले कई दिनों से पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के पास है। 16 फरवरी को दिल्ली सरकार ने चतुर्वेदी के तबादले की मांग की। 17 फरवरी को प्रकाश जावड़ेकर ने मीडिया में कहा कि केंद्र सरकार को इसमें कोई दिक्कत नहीं है।
एनडीटीवी इंडिया को फाइल ट्रेकिंग रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि चतुर्वेदी को रिलीज़ करने की कार्यवाही 18 फरवरी को शुरू हुई। 19 फरवरी को मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने फाइल को सचिव के पास भेजा, लेकिन जब सचिव अशोक लवासा ने 2 तारीख को ये फाइल वापस मंत्री जी के पास भेजी, तो उसके बाद से उस पर कुछ नहीं किया गया।
इस बीच चतुर्वेदी को पदमुक्त करने के लिए केजरीवाल सरकार केंद्र को रिमाइंडर भेजती रही है। पिछला रिमाइंडर 28 फरवरी को भेजा गया, लेकिन केंद्र इस बारे में चुप बैठा है। दिलचस्प है कि दिल्ली सरकार ने उत्तर प्रदेश और केंद्रीय राजस्व विभाग के अफसरों को भी डेप्युटेशन पर मांगा था, जिनके तबादले तुरंत कर दिए गए हैं।
सवाल ये है कि अरविंद केजरीवाल की फाइल मंत्री जी के पास क्यों पड़ी हुई है, जबकि खुद पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर ने मीडिया से कहा था कि चतुर्वेदी को रिलीव कर दिया जाएगा। इस बारे में हमने पर्यावरण मंत्री को सवाल भेजे, लेकिन कई बार कोशिश करने के बाद भी उसका कोई जवाब हमें नहीं दिया गया। सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि नई सरकार आने के बाद चतुर्वेदी की उस मांग पर हो रही कार्यवाही को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिसमें उन्होंने अपना काडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड करने की मांग की थी।
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