हजारों लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाला गुरुद्वारा अब सरकार के बयान पर हैरान

कोरोना की दूसरी लहर में हजारों लोगों को सड़क के किनारे ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाला गुरुद्वारा अब सरकार के उस बयान पर हैरान हैं जिसमें कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है.

हजारों लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाला गुरुद्वारा अब सरकार के बयान पर हैरान

गाजियाबाद:

कोरोना की दूसरी लहर में हजारों लोगों को सड़क के किनारे ऑक्सीजन उपलब्ध कराने वाला गुरुद्वारा अब सरकार के उस बयान पर हैरान हैं जिसमें कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है. ऑक्सीजन की कमी के तब क्या हालात थे. दिल्ली से सटे गाजियाबाद के इंदिरापुरम में गुरुद्वारे के बाहर सड़क पर कोई कार के अंदर बैठे मरीज को ऑक्सीजन देना पड़ रहा था तो कोई सड़क के किनारे कराहते हुए ऑक्सीजन ले रहा था. लेकिन ढ़ाई महीने बाद अब सरकार कह रही है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई. हम फिर उसी गुरुद्वारा और सड़क पर पहुंचे जहां कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन के लिए अफरातफरी का माहौल था. गुरुद्वारे के बाहर अब भी ऑक्सीजन की परमानेंट पाइप और ऑक्सीमीटर लगे मिले. अंदर ऑक्सीजन के दर्जनों बड़े बड़े सिलेंडर रखे हैं. बीते दो महीने के दौरान इस गुरुद्वारे ने 14000 से ज्यादा लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराया. 

इंदिरापुरम गुरुद्वारे के संचालक गुरुप्रीत सिंह भी सरकार के ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने वाले बयान पर हैरान हैं. उन्होंने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी थी तभी ऑक्सीजन का लंगर लगाया था. लोग एक एक सिलेंडर को लेने के लिए लाखों रुपए देने को तैयार थे. वो ऑक्सीजन की कमी की वजह से थी. हम सरकार के खिलाफ नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन सब लोग जानते हैं कि ऑक्सीजन की कमी थी.'

कोरोना से कारगर तरीके से निपटने की शाबाशी पहले ही प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को दे चुके हैं लेकिन अप्रैल महीने में खुद यूपी के स्वास्थ्य राद्य मंत्री के गृह जिले गाजियाबाद में एक एक सिलेंडर के लिए मारा मारी मची थी. उस वक्त इस गुरुद्वारे में ऑक्सीजन लेने के लिए लोग चार सौ किमी यानी लखनऊ कानपुर से मरीज आते थे जिसकी तस्दीक खुद दो महीने लगातार ऑक्सीजन देने वाले गुरुप्रीत सिंह करते हैं.

गुरुप्रीत सिंह कहते हैं, ''यहां लोग ऑक्सीजन लेने के लिए कानपुर, लखनऊ, मेरठ कहां-कहां से आते थे. कुछ ऐसे लोग आते जो जीवन हार चुके होते थे, लाख कोशिश के बावजूद हम नहीं बचा पाते थे.''

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कोरोना से ठीक हुए कई लोगों को अब भी ऑक्सीजन के सिलेंडर और कंसंट्रेटर की जरुरत पड़ रही है. लेकिन शायद सरकार महामारी की तैयारियों में कमियों से सीखने के बजाए पीठ थपथपाने में लगी है. जिन लोगों ने सड़क पर अस्पताल के बाहर के जमीनी हालात देखे हैं वो शायद ही सरकार की इस कागजी बात पर भरोसा करेंगे.