
छत्तीसगढ़ के निलंबित ADG गुरजिंदर पाल सिंह को सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिली है. कोर्ट ने निलंबित ADG को दो मामलो में 8 हफ़्तों के लिए अंतरिम राहत देते हुए कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है, हालांकि तीसरे मामले में राहत देने से इनकार करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि ये मामला जब हाईकोर्ट में चल रहा है तो हाई कोर्ट ही इसमें निर्णय लेगा. दरअसल, निलंबित ADG गुरजिंदर पाल अवैध संपत्ति, जबरन वसूली और देशद्रोह के मामले में आरोपी है.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फिर बड़ी टिप्पणी की थी. CJI एनवी रमना ने कहा थी कि आप हर मामले में सुरक्षा नहीं ले सकते. आपने पैसा वसूलना शुरू कर दिया, क्योंकि आप सरकार के करीब हैं. यही होता है अगर आप सरकार के करीब हैं और इन चीजों को करते हैं तो आपको एक दिन वापस भुगतान करना होगा. जब आप सरकार के साथ अच्छे हैं, आप वसूली कर सकते हैं, लेकिन आपको ब्याज के साथ भुगतान करना होगा. यह बहुत ज्यादा हो रहा है. हम ऐसे अधिकारियों को सुरक्षा क्यों दें? यह देश में एक नया ट्रेंड है. उन्हें जेल जाना होगा. हालांकि टिप्पणी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में दर्ज तीसरी FIR पर भी जीपी सिंह को गिरफ्तारी पर अंतरिम संरक्षण दे दिया था और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था.
जीपी सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा था कि इस प्रकार के अधिकारियों को सुरक्षा की आवश्यकता है. पिछली सुनवाई में भी पुलिस अफसरों के सत्ताधारी दलों के साथ गठजोड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी. CJI एनवी रमना ने कहा था कि देश में ये परेशानी करने वाला ट्रेंड है. पुलिस अफसर सत्ता में मौजूद राजनीतिक पार्टी का फेवर लेते हैं और उनके विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं. बाद में विरोधी सत्ता में आते हैं तो पुलिस अफसरों पर कार्यवाही करते हैं. इस हालात के लिए पुलिस विभाग को ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए. उनको कानून के शासन पर टिके रहना चाहिए. इसे रोकने की जरूरत है
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी छत्तीसगढ़ के निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह की याचिका पर की, हालांकि फिलहाल उन्हें राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस उन्हें चार हफ्ते तक राजद्रोह और आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार नहीं करेगी. इस संबंध में राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया गया है. अफसर को जांच में सहयोग करने को कहा गया है. दरअसल, IPS अफसर के खिलाफ IPC की धारा 124 A के तहत राजद्रोह और आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज किए गए हैं. इस मामले में अफसर ने दो याचिकाएं दाखिल ही हैं. इनमें राजद्रोह के मामले को रद्द करने की मांग है और दूसरी में मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग है.
इस दौरान अफसर की ओर से फली नरीमन ने अदालत को बताया कि अफसर को सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है. वहीं छतीसगढ़ सरकार की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि चार्जशीट पिछले हफ्ते दाखिल की गई है. वो दो महीने से अंडरग्राउंड हैं. वो वरिष्ठ पुलिस अफसर हैं. फिर भी फरार हैं. उनके खिलाफ हिंदी में काफी सामग्री मिली है. ये याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह पर छतीसगढ़ पुलिस ने राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया है.
वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में राज्य शासन ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह को निलंबित कर दिया है. राज्य सरकार ने अनुपात से ज्यादा संपत्ति अर्जित करने वाले भारतीय पुलिस सेवा 1994 बैच के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह (ADG) को निलंबित कर दिया है. इसमें ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा छापेमारी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1बी) 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने का हवाला देते हुए इसे अखिल भारतीय सेवा (आचरण) के खिलाफ माना गया है. बता दें कि जीपी सिंह 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वह निदेशक राज्य पुलिस अकादमी के पद पर पदस्थ थे. एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम ने एडीजी सिंह के निवास पर छापा मारा था. यह कार्रवाई करीब 64 घंटे तक चली थी. इस दौरान 10 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है. इस छापे की जद में एडीजी सिंह के करीबी लोग भी आए हैं
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