गुजरात की नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के निलंबित अधिकारी प्रदीप शर्मा ने उच्चतम न्यायालय से जासूसी विवाद में मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश देने का अनुरोध किया। उनका दावा है कि यह गैरकानूनी तरीके से किया गया था।
प्रदीप शर्मा ने न्यूज पोर्टल द्वारा जारी ऑडियो टेप का संज्ञान लेने का न्यायालय से अनुरोध किया है। शर्मा के अनुसार इसमें वह सबूत है कि राज्य सरकार ने किसी तरह उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने का प्रयास किया था।
शीर्ष अदालत में दाखिल अर्जी में शर्मा ने इस आवेदन के साथ संलग्न किए गए दस्तावेज और लिपि को रिकॉर्ड पर लेने तथा सीबीआई को मामला दर्ज करके नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और दूसरे व्यक्तियों द्वारा तार कानून, 1885 और दूसरे कानूनों के उल्लंघन के आरोपों की व्यापक जांच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने दावा किया है कि उनका शोषण किया जा रहा है क्योंकि उन्हें मोदी की युवा महिला आर्किटेक्ट के रिश्तों की जानकारी थी। उनका यह भी कहना है कि उनके छोटे भाई आईपीएस अधिकारी कुलदीप शर्मा ने गोधरा दंगों के बाद मोदी की अनेक कारगुजारियों का ‘पर्दाफाश’ किया था।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1984 बैच के अधिकारी प्रदीप शर्मा के खिलाफ कच्छ में 2008 में निजी फर्मों को भूमि आबंटन में कथित अनियमितताओं सहित छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। शर्मा चाहते हैं कि इन सभी मामलों को सीबीआई को सौंपा जाए।
भावनगर नगर निगम के आयुक्त रह चुके शर्मा को कच्छ के भूकंप पुनर्वास कार्यक्रम में अनियमितताओं में कथित संलिप्तता से संबंधित मामले में 6 जनवरी, 2010 को गिरफ्तार किया गया था। शर्मा का आरोप है कि मोदी सरकार उन्हें जानबूझ कर निशाना बना रही है।
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