
शिवसेना ने भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ अपना विरोध तेज करते हुए कहा है कि वह विधेयक का कड़ा विरोध करेगी और सत्ता में रहने की कीमत पर किसानों के हित ‘नष्ट’ करने का पाप नहीं करेगी।
महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने इस विधेयक को ‘कठोर’ बताते हुए कहा कि यह किसानों का अस्तित्व ही समाप्त कर देगा। शिवसेना ने कहा कि समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर एकत्र हुए किसानों के संघर्ष का ‘अपमान’ कर सरकार एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकती।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा, ‘सरकार ने अध्यादेश लाकर सभी को हैरान कर दिया है। हम हर कीमत पर इस विधेयक का विरोध करेंगे।’ पार्टी ने सरकार पर भूमि अधिग्रहण में कॉरपोरेट घरानों की मदद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये प्रश्न उठाए जा रहे हैं कि क्या सरकार रियल एस्टेट एजेंट की भूमिका में है।
शिवसेना ने कहा, ‘किसान पहले ही भारी कर्ज के बोझ तले दबे हैं लेकिन इस मामले में उनके लिए कुछ करने के बजाय यदि सरकार उनकी जमीन हथियाने पर तुली है तो अंसतोष की आग भड़केगी।’ उन्होंने कहा, ‘हम सत्ता में रहने की कीमत पर किसानों के हित नष्ट करने का अपराध नहीं करेंगे।’
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कल अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे राज्य के किसानों को भूमि अधिग्रहण विधेयक के मौजूदा प्रारूप के ‘दुष्प्रभावों’ के बारे में बताएं। उद्धव के यहां पार्टी पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करने के बाद शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई ने कहा था, ‘लोगों को पता होना चाहिए कि हमने क्या रख अपनाया है। इसके लिए शिवसेना के कार्यकर्ता किसानों को भूमि अधिग्रहण विधेयक के दुष्प्रभावों के बारे में बताएंगे।’
राज्य के उद्योग मंत्री देसाई ने कहा, ‘अब से सरकार को महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय दूसरों पर भी ध्यान देना होगा। इस मामले में पलट जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।’ उद्धव ने गत मंगलवार को कहा था कि किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी विधेयक को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने भाजपा को याद दिलाया कि पार्टी पर भरोसा जताते हुए किसान ही उसे सत्ता में लेकर आए हैं। उन्होंने कहा था, ‘लोगों का गला दबाने का पाप मत करो।’ उन्होंने कहा कि पार्टी आर्थिक विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन हम भूमि का जबरन अधिग्रहण करके विकास करने की इजाजत नहीं दे सकते।’ इस विधेयक को लेकर सरकार को कांग्रेस के अलावा अपने सहयोगियों शिवसेना, अकाली दल और लोजपा के भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
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