'सात वर्षों के 'मोदी राज' में जनता बेजार हुई, अन्ना ने तो करवट भी नहीं बदली', सामना में शिवसेना का तंज

संपादकीय में लिखा गया है, "मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते अन्ना दो बार दिल्ली आए और उन्होंने जोरदार आंदोलन किया. इस आंदोलन की मशाल में तेल डालने का काम तो भाजपा कर रही थी लेकिन विगत सात वर्षों में मोदी शासन में नोटबंदी से लॉकडाउन तक कई निर्णयों से जनता बेजार हुई, लेकिन अन्ना ने करवट भी नहीं बदली.

'सात वर्षों के 'मोदी राज' में जनता बेजार हुई, अन्ना ने तो करवट भी नहीं बदली', सामना में शिवसेना का तंज

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कल अन्ना हजारे से मुलाकात की थी.

खास बातें

  • अन्ना हजारे पर शिव सेना का 'सामना' के संपादकीय में तंज
  • पूछा- किसके साथ हैं अन्ना? किसानें के साथ या सरकार के साथ?
  • 'मोदी राज' में जनता बेजार हुई, अन्ना ने तो करवट भी नहीं बदली- सामना
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिव सेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र 'सामना' में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) पर निशाना साधा है और उनके द्वारा अपने प्रस्तावित अनशन को रद्द किए जाने पर तंज कसा है. सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि अब अन्ना को बताना चाहिए कि वो किसान के साथ हैं या सरकार के साथ हैं? संपादकीय का शीर्षक है- 'अण्णा किसकी ओर हैं!'

संपादकीय में लिखा गया है, "मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते अन्ना दो बार दिल्ली आए और उन्होंने जोरदार आंदोलन किया. इस आंदोलन की मशाल में तेल डालने का काम तो भाजपा कर रही थी लेकिन विगत सात वर्षों में मोदी शासन में नोटबंदी से लॉकडाउन तक कई निर्णयों से जनता बेजार हुई, लेकिन अन्ना ने करवट भी नहीं बदली, ऐसा आरोप भी होता रहा है. मतलब आंदोलन सिर्फ कांग्रेस के शासन में करना है क्या? बाकी अब रामराज अवतरित हो गया है क्या?"

Kisan Andolan LIVE Updates : महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज किसानों का उपवास, दिल्ली बॉर्डर पर पहरा हुआ सख्त

संपादकीय में आगे लिखा है, "अन्ना द्वारा अनशन का अस्त्र बाहर निकालना और बाद में उसे म्यान में डाल देना, ऐसा इससे पहले भी हो चुका है. इसलिए अभी भी हुआ तो इसमें अनपेक्षित जैसा कुछ नहीं था. भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासन के कारण अन्ना संतुष्ट हो गए होंगे तो यह उनकी समस्या है. किसानों के मामले में दमन का फिलहाल जो चक्र चल रहा है, कृषि कानूनों के कारण जो दहशत पैदा हुई है बुनियादी सवाल उसे लेकर है. इस संदर्भ में एक निर्णायक भूमिका अन्ना अख्तियार कर रहे हैं और उसी दृष्टिकोण से अनशन कर रहे हैं, ऐसा दृश्य निर्माण हुआ था, परंतु अन्ना ने अनशन पीछे ले लिया. इसलिए कृषि कानून को लेकर उनकी निश्चित तौर पर भूमिका क्या है, फिलहाल तो यह अस्पष्ट ही है."

भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने राकेश टिकैत से की मुलाकात, बोले- कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे


बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कल अन्ना हजारे से मुलाकात की थी और उन्हें सरकार द्वारा उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आश्वासन दिया था. इसके बाद अन्ना ने अपने अनशन को टालने का एलान किया है.

वीडियो- टिकैत के बुलाने पर हजारों की संख्या में किसान पहुंचे गाजीपुर बॉर्डर

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com