
नई दिल्ली:
राष्ट्रपति पद के भाजपा समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा की इस दलील को राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया है कि संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का भारतीय सांख्यिकी संस्थान से इस्तीफा फर्जी है और वास्तविक नहीं है। निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस आपत्ति में कोई आधार नहीं है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा महासचिव वीके अग्निहोत्री ने अपने आदेश में कहा, ‘मेरे विचार से पत्र पर दस्तखत करने वाले को इस बात से इनकार करने का हक है कि हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। अन्यथा मेरे लिए यह मानने की कोई वजह नहीं है कि प्रणब मुखर्जी के दस्तखत वास्तविक नहीं हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मामले में उन्होंने खुद पत्र जमा किया है जिसे उन्होंने अपना पत्र होने का दावा किया है। इसलिए मुझे यह मानने की कोई वजह नजर नहीं आती कि पत्र प्रथमदृष्टया वास्तविक नहीं है।’ संगमा ने मुखर्जी का नामांकन इस आधार पर खारिज करने की मांग की थी कि वह आईएसआई के अध्यक्ष पद पर बने रहे जो कि लाभ का पद है। उनकी इस याचिका पर निर्वाचन अधिकारी ने आदेश जारी किया।
संगमा के प्रतिनिधि सत्यपाल जैन ने दलील पेश की थी कि लोकसभा और आईएसआई की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार मुखर्जी को नामांकन पत्र की छंटनी की तारीख दो जुलाई को भी संस्थान का चेयरमैन बताया गया।
मुखर्जी के प्रतिनिधि और संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने मुखर्जी के अलग अलग दस्तखतों का जिक्र करते हुए कहा कि आईएसआई अध्यक्ष एमजीके मेनन को भेजे पत्र में उनके ‘सामान्य हस्ताक्षर’ हैं जबकि निर्वाचन अधिकारी को दिये हलफनामे में उन्होंने उसी तरह से दस्तखत किए हैं, जैसे कि उन्होंने नामांकन पत्र पर औपचारिक तरीके से किए हैं। अग्निहोत्री ने बंसल की इस दलील को माना कि मुखर्जी का 20 जून को दिया इस्तीफा किसी भी तरह उसी दिन मंजूर किया जाना था।
निर्वाचन अधिकारी ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उन्होंने ‘स्वीकृत’ :एक्सपेप्टिड: लिखे हुए इस्तीफे की प्रति भी दी है।’’ आईएसआई की वेबसाइट पर मुखर्जी का नाम बाद तक चेयरमैन के तौर पर अंकित होने संबंधी जैन के तर्क पर निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सभी जानते हैं कि वेबसाइट पर सूचना अक्सर ताजा नहीं होती।
उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर जानकारी बदलने के लिए अधिकारियों के पास एक प्रक्रिया और कार्यक्रम होता है। वेबसाइट की जानकारी को निर्विवाद साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
अग्निहोत्री ने कहा, ‘‘पीए संगमा के योग्य अधिकृत प्रतिनिधि सत्यपाल जैन ने वेबसाइटों के प्रिंट-आउट के अलावा कोई अन्य दस्तावेजी साक्ष्य नहीं दिया है।’’ उन्होंने संगमा खेमे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि त्यागपत्र उचित तरीके से नहीं दिया गया या सक्षम अधिकारी ने उसे मंजूर नहीं किया है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा महासचिव वीके अग्निहोत्री ने अपने आदेश में कहा, ‘मेरे विचार से पत्र पर दस्तखत करने वाले को इस बात से इनकार करने का हक है कि हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। अन्यथा मेरे लिए यह मानने की कोई वजह नहीं है कि प्रणब मुखर्जी के दस्तखत वास्तविक नहीं हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मामले में उन्होंने खुद पत्र जमा किया है जिसे उन्होंने अपना पत्र होने का दावा किया है। इसलिए मुझे यह मानने की कोई वजह नजर नहीं आती कि पत्र प्रथमदृष्टया वास्तविक नहीं है।’ संगमा ने मुखर्जी का नामांकन इस आधार पर खारिज करने की मांग की थी कि वह आईएसआई के अध्यक्ष पद पर बने रहे जो कि लाभ का पद है। उनकी इस याचिका पर निर्वाचन अधिकारी ने आदेश जारी किया।
संगमा के प्रतिनिधि सत्यपाल जैन ने दलील पेश की थी कि लोकसभा और आईएसआई की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार मुखर्जी को नामांकन पत्र की छंटनी की तारीख दो जुलाई को भी संस्थान का चेयरमैन बताया गया।
मुखर्जी के प्रतिनिधि और संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने मुखर्जी के अलग अलग दस्तखतों का जिक्र करते हुए कहा कि आईएसआई अध्यक्ष एमजीके मेनन को भेजे पत्र में उनके ‘सामान्य हस्ताक्षर’ हैं जबकि निर्वाचन अधिकारी को दिये हलफनामे में उन्होंने उसी तरह से दस्तखत किए हैं, जैसे कि उन्होंने नामांकन पत्र पर औपचारिक तरीके से किए हैं। अग्निहोत्री ने बंसल की इस दलील को माना कि मुखर्जी का 20 जून को दिया इस्तीफा किसी भी तरह उसी दिन मंजूर किया जाना था।
निर्वाचन अधिकारी ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उन्होंने ‘स्वीकृत’ :एक्सपेप्टिड: लिखे हुए इस्तीफे की प्रति भी दी है।’’ आईएसआई की वेबसाइट पर मुखर्जी का नाम बाद तक चेयरमैन के तौर पर अंकित होने संबंधी जैन के तर्क पर निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सभी जानते हैं कि वेबसाइट पर सूचना अक्सर ताजा नहीं होती।
उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर जानकारी बदलने के लिए अधिकारियों के पास एक प्रक्रिया और कार्यक्रम होता है। वेबसाइट की जानकारी को निर्विवाद साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
अग्निहोत्री ने कहा, ‘‘पीए संगमा के योग्य अधिकृत प्रतिनिधि सत्यपाल जैन ने वेबसाइटों के प्रिंट-आउट के अलावा कोई अन्य दस्तावेजी साक्ष्य नहीं दिया है।’’ उन्होंने संगमा खेमे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि त्यागपत्र उचित तरीके से नहीं दिया गया या सक्षम अधिकारी ने उसे मंजूर नहीं किया है।
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