रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 जीडीपी की विकास दर 10.5% से घटाकर 9.5% की

कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave of Corona) को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाऊन की वजह से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और इसकी वजह से जीडीपी की ग्रोथ फोरकास्ट आरबीआई ने 10.5% से घटाकर 9.5% कर दिया है.

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 जीडीपी की विकास दर 10.5% से घटाकर 9.5% की

7 अप्रैल को आरबीआई गवर्नर ने जीडीपी ग्रोथ रेट 10.5% रहने का फोरकास्ट किया था

नई दिल्ली:

कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave of Corona) को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाऊन की वजह से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और इसकी वजह से जीडीपी की ग्रोथ फोरकास्ट आरबीआई ने 10.5% से घटाकर 9.5% कर दिया है. आरबीआई ने आगाह किया है अर्थव्यवस्था के हालात को सुधरने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज़ करना बेहद ज़रूरी है. कोरोना की दूसरी लहर और देश के बड़े हिस्से में लगे लॉकडाऊन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था कमज़ोर पड़ती जा रही है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा - मौजूदा वित्तीय साल में जीडीपी की ग्रोथ रेट 9.5% रहेगी जबकि अप्रैल 7 को आरबीआई गवर्नर ने जीडीपी ग्रोथ रेट 10.5% रहने का फोरकास्ट किया था. यानी कोरोना की दूसरी लहर की वजह से अर्थव्यवस्था की रफ़्तार 1% घटने का अंदेशा है.

आरबीआई ने पॉलिसी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. आरबीआई गवर्नर ने ऐलान किया की लॉकडाऊन और कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित होने वाले होटल, पर्यटन सेक्टर से जुड़ी इकाइयों को लिक्विडिटी सपोर्ट मुहैया कराई जाएगी. बैंक इन सेक्टरों से जुड़ी इकाइयों को 15000 करोड़ तक की लेंडिंग कर सकेंगे.


छोटी-लघु इकाइयों को क्रेडिट की सुविधा बढ़ाने के लिए SIDBI को 16000 करोड़ की स्पेशल लिक्विडिटी फैसिलिटी दी जाएगी. आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था के हालात सुधारने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज़ करने को महत्वपूर्ण बताया.

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इससे पहले कई भारतीय और ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों ने भी मौजूद वित्तीय साल में जीडीपी की रफ़्तार अनुमान से नीचे गिरने का अंदेशा जताया है. अब आरबीआई के आधिकारिक आंकलन के बाद अर्थव्यवस्था पर कोरोना के गहराते साया की चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार को जल्दी हस्तक्षेप करना होगा.