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This Article is From Jul 23, 2015

रेपिस्ट को नहीं मिल सकती उम्रकैद की सजा में छूट, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

रेपिस्ट को नहीं मिल सकती उम्रकैद की सजा में छूट, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली: एक अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रेप और रेप व हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे लोगों को सजा में छूट देकर रिहा नहीं किया जा सकता। अपने पुराने आदेशों में संशोधन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों को वक्त से पहले रिहा करने के फैसले पर लगी रोक हटा ली। लेकिन साथ की कई शर्तें भी लगा दीं। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार को ये आदेश सुनाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब राज्य उम्रकैद के दोषियों को रिहा कर सकेंगे लेकिन इसके लिए कुछ मानक तय किए गए हैं। रेप और रेप व हत्या के दोषी को उम्रकैद से रिहाई नहीं दी जा सकती। जिन केसों में सीबीआई जैसी सेंट्रल एजेंसी ने जांच की है और जिन मामलों में सेंट्रल एक्ट लगे हैं, उनके दोषियों को भी रिहा नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन केसों में कोर्ट ने आदेश में उम्रकैद के लिए पूरी उम्र कैद में लिखा है और जिनमें कम से कम वक्त जेल में गुजारने का आदेश लिखा है, उन्हें भी राहत नहीं दी जा सकती।

उदाहरण के तौर पर कई मामलों में कोर्ट तय करती है कि दोषी को उम्रकैद में 20 या 25 साल तक वक्त से पहले रिहा नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि सरकार इस वक्त से पहले उसकी अर्जी पर रिहा करने के फैसले पर गौर नहीं कर सकती। दअरसल कानून में प्रावधान है कि उम्रकैद के दोषियों को 14 साल या फिर 20 साल की कैद के बाद सजा में छूट दी जा सकती है।

दरअसल राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के मामले की सुनवाई के दौरान पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा था कि किसी भी उम्रकैद के दोषी को रिहा नहीं किया जाएगा।

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