New Delhi:
सरकार के साथ शुक्रवार को करीब पांच घंटे लंबी चली वार्ता और मनाए जाने की कोशिशों से अविचलित योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार सुबह रामलीला मैदान में अपना अनशन शुरू कर दिया। काला धन को मुद्दा बनाकर किए जा रहे इस प्रदर्शन में हजारों समर्थक शरीक हुए हैं और देश के अन्य भागों से भी इसे काफी समर्थन मिल रहा है। मुंबई, जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य कई शहरों में बाबा के हजारों समर्थकों ने अनशन किया है। रामदेव ने हजारों की तादाद में जमा अपने समर्थकों को सुबह 5 बजे से योगासन सिखाया और इसके बाद सुबह 7 बजे से अपना अनशन शुरू कर दिया। योग गुरु ने अनशन शुरू करते हुए कहा कि उनके खिलाफ साजिश करने की कोशिशें हुई हैं। हालांकि, रामदेव ने यह नहीं बताया कि ये साजिशें क्या हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार देर रात केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने रामदेव को अनशन पर नहीं जाने के लिए मनाने के मकसद से रामलीला मैदान पर उनसे मुलाकात की, लेकिन सरकार की यह कोशिश भी विफल रही। सरकार की ओर से शुक्रवार रात जारी वक्तव्य में भी महत्वपूर्ण तौर पर कहा गया कि केंद्र भ्रष्टाचारियों को दी जाने वाली अधिकतम सजा को पर्याप्त रूप से बढ़ाने के लिए प्रावधान करेगा। पतंजलि योगपीठ और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि रामदेव के अनशन स्थल, रामलीला मैदान पर 50,000 से अधिक समर्थक जुट चुके हैं। रामलीला मैदान के बाहर भी वे लोग करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लगाए खड़े हैं जो रामदेव के अनशन से जुड़ना चाहते हैं। रामदेव ने सुबह अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि महज एसएमएस सेवा के जरिये ही देश भर से करीब 1 करोड़ 16 लाख लोग उनके सत्याग्रह से जुड़ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ब्रिटेन के बड़े शहरों सहित विश्व भर में मौजूद उनके समर्थक इस अनशन में उनका साथ दे रहे हैं। अनशन और प्रदर्शन के महत्व पर रामदेव ने कहा, भारत को इस प्रदर्शन से क्या मिलेगा? भारत को अब बचाया जाएगा और लोगों को पहली बार सभी सरकारी पेशेवर कॉलेजों में अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिलेगा। इससे पहले रामदेव को मनाने की कोशिश के तहत शुक्रवार को दिल्ली के एक होटल में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और सुबोध कांत सहाय ने योग गुरु से करीब 5 घंटे बातचीत की थी। इसके बाद रामदेव ने दावा किया कि सरकार उनकी 90 फीसदी मांगों पर सहमत हो चुकी है, लेकिन उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जब तक पूरी मांगें नहीं मान ली जाएंगी, तब तक वह अपना अनशन वापस नहीं लेंगे। रामदेव ने दावा किया था कि सरकार विदेशों में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है, लेकिन सरकार ने इस संबंध में अध्यादेश जारी करने के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया है। रामदेव के उठाए मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया के तौर पर शुक्रवार रात कैबिनेट सचिवालय ने भी एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें बिंदुवार तरीके से यह बताया गया कि सरकार काले धन के मसले से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। कैबिनेट सचिवालय का वक्तव्य भी संकेत देता है कि पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी सहित भारतीय भाषाओं में भी कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोक सेवा वितरण अधिनियम के लिए संसद में जल्द से जल्द विधेयक पेश करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है। रामदेव का अनशन शुरू होने के चलते सैकड़ों की संख्या में बड़ी तेजी से जुट रहे लोगों की भीड़ के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। दिल्ली पुलिस के पुलिसकर्मियों के साथ ही कमांडो भी मोर्चा संभाले हुए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर रामलीला मैदान में प्रवेश के लिए एक ही द्वार रखा गया है, जहां मेटल डिटेक्टर वाले दरवाजे लगाए गए हैं और लोगों की दो-दो बार तलाशी भी ली जा रही है। सुबह साध्वी ऋतंभरा ने भी रामदेव के अनशन के समर्थन में रामलीला मैदान पर जमा लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी रामदेव के अनशन को समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं। योग गुरु ने अन्ना हजारे पक्ष को आश्वासन दिया था कि वह अनशन के दौरान मंच पर किसी भी साम्प्रदायिक ताकत को नहीं आने देंगे।
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