नई दिल्ली:
जेल में बंद पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा के पूर्व अतिरिक्त निजी सहायक ए. आचार्य ने सोमवार को यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत में कहा कि डीएमके नेता ने मंत्रालय का कार्यभार सम्भालने से काफी पहले ही 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस का षडयंत्र रच लिया था। 2जी मामले में अहम गवाह आचार्य ने बताया कि पूर्व दूरसंचार मंत्री राजा स्वान टेलीकाम के प्रवर्तकों शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका व यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चन्द्रा के संपर्क में थे और 2004 से 07 के दौरान पर्यावरण एवं वन मंत्री रहते हुए उन्होंने उनकी परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। आचार्य ने विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी को बताया कि 2जी मामले में आरोपी ये तीनों व्यक्ति पर्यावरण मंत्रालय में अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए राजा और उनके पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया से मिला करते थे। मामले में सातवें गवाह के तौर पर अपने पहले के बयान में कायम आचार्य ने कहा कि वह अक्टूबर-1999 से अक्टूबर-2008 तक राजा से जुड़े रहे। उन्होंने कहा, पर्यावरण मंत्री के तौर पर राजा ने जिन बड़ी निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी उनमें यूनिटेक, डीबी रीयल्टी और अन्य कंपनियों की परियोजनाएं शामिल हैं। मुझे इस तरह की मंजूरियों के लिए प्रक्रिया मालूम नहीं क्योंकि मैं इनमें शामिल नहीं था। आचार्य ने कहा, वह जहां तक यूनिटेक का संबंध है, संजय चन्द्रा और जहां तक डीबी रीयल्टी का संबंध है, शाहिद बलवा एवं विनोद गोयनका मामले को देखा करते थे। वे पर्यावरण मंत्रालय में अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए नियमित तौर पर राजा और चंदोलिया से मिला करते थे। वे सितंबर-दिसंबर-2007 के दौरान राजा के आधिकारिक आवास पर भी जाया करते थे। उसने प्रधानमंत्री को संबोधित किए गए 2 नवंबर, 2007 के पत्रों पर राजा के हस्ताक्षर की पहचान की और कहा कि इनमें से एक पत्र रात्रि नौ बजे के बाद राजा के आधिकारिक आवास पर बोलकर लिखाया गया और टाइप किया गया।
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
2जी, राजा, निजी, सचिव, बयान