राफेल मामले में नया ट्विस्‍ट : कागजात बताते हैं, जांच एजेंसी ने कथित दलाली के आरोपों पर कार्रवाई नहीं की

NDTV को कुछ और ऐसे दस्‍तावेज मिले है जो बताते हैं कि वर्ष 2019 में, भारत की ओर से राफेल डील पर साइन किए जाने के तीन साल बाद, सीबीआई सहित केंद्रीय एजेंसियों को दसॉ की ओर से दी गई संभावित रिश्‍वत को लेकर अलर्ट किया गया था लेकिन ये इन आरोपों पर पर कार्रवाई करने में नाकाम रहीं.

नई दिल्‍ली :

राफेल सौदे ( Rafale deal) को लेकर छिड़े सियासी विवाद के बीच NDTV को इस बात के कुछ और सबूत मिले हैं कि भारतीय जाांच एजेंसियों ने इन आरोपों की अनदेखी की कि राफेल जेट फाइटर की निर्माता फ्रेंच कंपनी दसॉ ने बीजेपी नीत एनडीए 1.0 और कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान बिचौलियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया होगा. गौरतलब है कि एक दिन पहले ही फ्रेंच पोर्टल 'Mediapart' की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि फ्रेंच विमान निर्माता कंपनी दसॉ (Dassault) ने भारत को 36 राफेल फाइटर जेट बेचने का सौदा हासिल करने के लिए मिडिलमैन (बिचौलिये) सुशेन गुप्‍ता को करीब 13 मिलियन यूरो (आज की दर से लगभग 110 करोड़ रुपये ) का भुगतान किया और भारतीय एजेंसियां, दस्‍तावेज होने के बावजूद इसकी जांच करने में नाकाम रहीं. 

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अब NDTV को कुछ और ऐसे दस्‍तावेज मिले है जो बताते हैं कि वर्ष 2019 में, भारत की ओर से राफेल डील पर साइन किए जाने के तीन साल बाद, सीबीआई सहित केंद्रीय एजेंसियों को दसॉ की ओर से दी गई संभावित रिश्‍वत को लेकर अलर्ट किया गया था लेकिन ये (जांच एजेंसियां) इन आरोपों पर पर कार्रवाई करने में नाकाम रहीं. इस तरह के आरोप भारतीय कानून के अनुसार, दसॉ कंपनी को blacklist किया जा सकता था. ये दस्‍तावेज (डॉक्‍यूमेंट) देश के शीर्ष नेताओं के लिए 12 अगस्‍तावेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टरों की बिक्री में  कथित भ्रष्‍टाचार पर सीबीआई के आरोप पत्र का हिस्‍सा हैं.  NDTV को जो एक्सक्लूसिव डॉक्युमेंट मिले हैं, उससे लगता है कि सीबीआई, रफ़ाल पर 'निष्क्रिय' रही है.ये बात आईटी सर्विस कंपनी IDS के तत्कालीन मैनेजर धीरज अग्रवाल के बयान से सामने आई है. उन्होंने माना है कि कंपनी दाग़ी बिचौलिए सुशेन गुप्ता से जुड़ी है. यह मार्च 2019 की बात है.

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धीरज के मुताबिक दसॉ के 40% भुगतान आइडीएस को गुप्ता की मॉरीशस वाली कंपनी इंटरस्टेलर को कमीशन के तौर पर हुए. 2003-2006 के बीच आइडीएस ने दसॉ के 4.15 करोड़ इंटरस्टेलर को भेजे. दरअसल, ये बात इसलिए अहम है कि भारतीय कानूनों के मुताबिक दलाली में फंसी कंपनी को सस्पेंड किया जाएगा, बैन कर दिया जाएगा। इसके बावजूद रफ़ाल से भारत ने सौदा किया.  भुगतान की अवधि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार, जो 2004 तक सत्‍ता में रही और यूपीए सरकार, जो इसके तुरंत बाद सत्‍ता में आई, तक  फैली हुई है. इस गवाही को अपनी कोर्ट फाइलिंग में शामिल करने के बावजूद सीबीआई ने कंपनी के खिलाफ जांच शुरू नहीं की.