
नई दिल्ली:
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल में चार साल पूरे होने पर सरकार के संकटमोचक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सुझाया है कि यह पार्टी के मौजूदा उपाध्यक्ष राहुल गांधी को वर्ष 2014 में होने जा रहे आम चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने के लिए सही वक्त है।
एनडीटीवी से बातचीत के दौरान केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने इस संभावना को पूरी तरह नकार दिया कि लोकसभा चुनाव वर्ष 2014 के मध्य में निर्धारित समय से पहले ही हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है, चुनाव जब होने हैं, तभी होंगे, अपने निर्धारित समय पर... आज जो स्थिति है, उसमें कोई संभावना नहीं है..."
कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले राहुल गांधी के बारे में कमलनाथ ने कहा, "वह (राहुल) पूरी तरह राजनीति में रम चुके हैं... उनके पास कांग्रेस में भी उपाध्यक्ष के रूप में काम करने का अनुभव है, और अब उन्हें कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया जाना चाहिए... (मौजूदा प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह अपने 10 साल पूरे कर चुके हैं..."
हालांकि कांग्रेस में लम्बे समय से 43-वर्षीय राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने की मांग जारी है, लेकिन एक ओर तो पार्टी ने अभी तक ऐसा नहीं किया है, और दूसरी ओर, प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी कई बार ऐसे संकेत दे चुके हैं, कि वह स्वयं प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं।
उधर, यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार पूरे होने पर जहां सरकार उपलब्धियां गिनाने में जुटी है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार के कामकाज पर जमकर सवाल उठाए, और कहा, सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार को चार साल पूरे करने का जश्न मनाने का हक नहीं है, और कायदे से उसे देश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए, और आत्मचिंतन करना चाहिए।
इस बीच, राज्यसभा में पार्टी के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार की उपलब्धि बस इतनी है कि उसने चार साल पूरे कर लिए। वैसे उसे यह उपलब्धि भी इसलिए हासिल हुई, क्योंकि सरकार ने सीबीआई का जमकर दुरुपयोग किया। अगर सरकार ऐसा (सीबीआई का दुरुपयोग) नहीं करती तो समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उसे हमेशा नहीं बचाते रहते।
इस मौके पर बीजेपी के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा। सुषमा ने कहा कि मनमोहन सिंह न नेता बन पाए, न प्रधानमंत्री, जबकि अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री का ओहदा मजाक का पात्र बनकर रह गया है। दरअसल, बीजेपी आरोप लगाती रही है कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री होने के बावजूद सभी तरह के निर्णय यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिए जाते हैं।
एनडीटीवी से बातचीत के दौरान केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने इस संभावना को पूरी तरह नकार दिया कि लोकसभा चुनाव वर्ष 2014 के मध्य में निर्धारित समय से पहले ही हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है, चुनाव जब होने हैं, तभी होंगे, अपने निर्धारित समय पर... आज जो स्थिति है, उसमें कोई संभावना नहीं है..."
कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले राहुल गांधी के बारे में कमलनाथ ने कहा, "वह (राहुल) पूरी तरह राजनीति में रम चुके हैं... उनके पास कांग्रेस में भी उपाध्यक्ष के रूप में काम करने का अनुभव है, और अब उन्हें कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया जाना चाहिए... (मौजूदा प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह अपने 10 साल पूरे कर चुके हैं..."
हालांकि कांग्रेस में लम्बे समय से 43-वर्षीय राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने की मांग जारी है, लेकिन एक ओर तो पार्टी ने अभी तक ऐसा नहीं किया है, और दूसरी ओर, प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी कई बार ऐसे संकेत दे चुके हैं, कि वह स्वयं प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं।
उधर, यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार पूरे होने पर जहां सरकार उपलब्धियां गिनाने में जुटी है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार के कामकाज पर जमकर सवाल उठाए, और कहा, सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार को चार साल पूरे करने का जश्न मनाने का हक नहीं है, और कायदे से उसे देश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए, और आत्मचिंतन करना चाहिए।
इस बीच, राज्यसभा में पार्टी के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार की उपलब्धि बस इतनी है कि उसने चार साल पूरे कर लिए। वैसे उसे यह उपलब्धि भी इसलिए हासिल हुई, क्योंकि सरकार ने सीबीआई का जमकर दुरुपयोग किया। अगर सरकार ऐसा (सीबीआई का दुरुपयोग) नहीं करती तो समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उसे हमेशा नहीं बचाते रहते।
इस मौके पर बीजेपी के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा। सुषमा ने कहा कि मनमोहन सिंह न नेता बन पाए, न प्रधानमंत्री, जबकि अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री का ओहदा मजाक का पात्र बनकर रह गया है। दरअसल, बीजेपी आरोप लगाती रही है कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री होने के बावजूद सभी तरह के निर्णय यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिए जाते हैं।
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