
राज बब्बर (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
अगले वर्ष चुनावी समर में उतरने जा रहे उत्तर प्रदेश में राज बब्बर को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया गया है। राजेश खन्ना, शत्रुध्न सिन्हा और विनोद खन्ना जैसे बॉलीवुड अभिनेताओं की तरह राज बब्बर ने भी अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीतने के बाद सियासत में एंट्री की है। 'इंसाफ का तराजू' और 'निकाह' जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके 64 वर्षीय राज बब्बर ने वर्ष 1989 में जनता दल से जुड़कर राजनीति की शुरुआत की थी।
वह दौर वीपी सिंह का था जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ विरोध को जनआंदोलन का रूप दिया था और देश के प्रधानमंत्री बने थे। बहरहाल, समय के साथ-साथ राज बब्बर का जनता दल से मोह भंग होता गया और वे मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इसी पार्टी के टिकट पर वे सांसद भी बने। बाद में सपा के साथ भी उनके संबंध मधुर नहीं रहे। नौबत यहां तक आ पहुंची कि अनुशासनहीनता के चलते सपा ने उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में राज बब्बर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
कांग्रेस नेता के तौर पर राज बब्बर का नाम तब राष्ट्रीय सुर्खिंयों में आया जब उन्होंने वर्ष 2009 में फिरोजाबाद सीट पर हुए उपचुनाव में यूपी के मौजूदा सीएम अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम की पुत्र वधू डिंपल यादव को हरा दिया। इसके बाद राज बब्बर का ग्राफ कांग्रेस में ऊपर चढ़ता गया। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने गाजियाबाद से लड़ा था लेकिन तब वे बीजेपी के जनरल वीके सिंह से हार गये थे। राजब्बर फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं।
बेबाक बयानी के लिए चर्चित राज बब्बर उस समय विवादों में फंस गए थे जब उन्होंने वर्ष 2013 में योजना आयोग के गरीबी के नए आंकड़ों का बचाव करते हुए ऐसी बात कह दी जो उनके लिए ही भारी पड़ गई। राज बब्बर ने उस समय कहा था कि मुंबई में 12 रुपये में भरपेट खाना खाया जा सकता है। विपक्षी पार्टियों ने इस बयान को 'लपकते' हुए निशाना साधा। इन पार्टियों का कहना था कि राज बब्बर जमीनी हकीकत से बेहद दूर हैं।
मामले को तूल पकड़ते देख राज बब्बर को इस बयान पर खेद व्यक्त करना पड़ा था। वे इस समय कांग्रेस के प्रवक्ता की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यूपी के नए कांग्रेस अध्यक्ष बने राज बब्बर के सामने निष्क्रिय पड़े पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश का संचार करते हुए पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कठिन चुनौती है। देश के सबसे बड़े राज्य में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन उनके सियासी करियर को नई ऊंचाई दे सकता है..।
वह दौर वीपी सिंह का था जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ विरोध को जनआंदोलन का रूप दिया था और देश के प्रधानमंत्री बने थे। बहरहाल, समय के साथ-साथ राज बब्बर का जनता दल से मोह भंग होता गया और वे मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इसी पार्टी के टिकट पर वे सांसद भी बने। बाद में सपा के साथ भी उनके संबंध मधुर नहीं रहे। नौबत यहां तक आ पहुंची कि अनुशासनहीनता के चलते सपा ने उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में राज बब्बर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
कांग्रेस नेता के तौर पर राज बब्बर का नाम तब राष्ट्रीय सुर्खिंयों में आया जब उन्होंने वर्ष 2009 में फिरोजाबाद सीट पर हुए उपचुनाव में यूपी के मौजूदा सीएम अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम की पुत्र वधू डिंपल यादव को हरा दिया। इसके बाद राज बब्बर का ग्राफ कांग्रेस में ऊपर चढ़ता गया। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने गाजियाबाद से लड़ा था लेकिन तब वे बीजेपी के जनरल वीके सिंह से हार गये थे। राजब्बर फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं।
बेबाक बयानी के लिए चर्चित राज बब्बर उस समय विवादों में फंस गए थे जब उन्होंने वर्ष 2013 में योजना आयोग के गरीबी के नए आंकड़ों का बचाव करते हुए ऐसी बात कह दी जो उनके लिए ही भारी पड़ गई। राज बब्बर ने उस समय कहा था कि मुंबई में 12 रुपये में भरपेट खाना खाया जा सकता है। विपक्षी पार्टियों ने इस बयान को 'लपकते' हुए निशाना साधा। इन पार्टियों का कहना था कि राज बब्बर जमीनी हकीकत से बेहद दूर हैं।
मामले को तूल पकड़ते देख राज बब्बर को इस बयान पर खेद व्यक्त करना पड़ा था। वे इस समय कांग्रेस के प्रवक्ता की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यूपी के नए कांग्रेस अध्यक्ष बने राज बब्बर के सामने निष्क्रिय पड़े पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश का संचार करते हुए पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कठिन चुनौती है। देश के सबसे बड़े राज्य में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन उनके सियासी करियर को नई ऊंचाई दे सकता है..।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
राज बब्बर, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष, विधानसभा चुनाव, Raj Babbar, UP Congress Chief, Assembly Election