'गांधी परिवार के साथ 2 सालों तक होती रही बातचीत लेकिन...' कांग्रेस संग नाकाम रिश्तों पर बोले प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि 'दोनों के साथ आने के  लिए विश्वास बढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन बहुत से कारणों की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया. 2017 में यूपी चुनावों के दौरान मेरा उनके साथ मेरा अनुभव अच्छा नहीं रहा था, इसलिए मैं थोड़ा सशंकित था. मैं फिर से इसमें अपने हाथ नहीं बंधने देना चाहता था.'

नई दिल्ली:

चुनाव रणनीतिककारप्रशांत किशोर (Prashant Kishor)ने सोमवार को NDTV से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद लगभग पांच महीने की चर्चा के बाद भी कांग्रेस के साथ उनकी बातचीत हुई थी, लेकिन विफल रही. उन्होंने कहा कि हालांकि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को हराने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसका वर्तमान नेतृ्त्व (गांधी परिवार) फिलहाल ऐसी स्थिति में नहीं दिख रहा. 

प्रशांत किशोर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि बंगाल के नतीजों के बाद मैंने अधिक से अधिक समय कांग्रेस के साथ बातचीत में बिताया. लगभग पांच महीने मई और सितंबर के बीच मैंने अपना हर मिनट दिया. मैं कुल मिलाकर करीब दो साल तक पार्टी के साथ चर्चा में रहा. 

उन्होंने आगे कहा कि दूसरों को स्वाभाविक तौर पर ये लगता है कि प्रशांत किशोर और कांग्रेस को साथ मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन साथ काम करने के लिए दोनों तरफ से भरोसे का कदम बढ़ाया जाना जरूरी है. कांग्रेस की तरफ से इसकी कमी है, जैसा कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने पिछले हफ्ते NDTV के साथ बातचीत के दौरान इस बात की पुष्टि भी की थी.

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि 'दोनों के साथ आने के  लिए विश्वास बढ़ाने की जरूरत थी, लेकिन बहुत से कारणों की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया. 2017 में यूपी चुनावों के दौरान मेरा उनके साथ मेरा अनुभव अच्छा नहीं रहा था, इसलिए मैं थोड़ा सशंकित था. मैं फिर से इसमें अपने हाथ नहीं बंधने देना चाहता था.'

2024 में BJP को कैसे हराया जा सकता है? प्रशांत किशोर ने बताया तीन सूत्री फार्मूला

किशोर ने कहा कि 'अगर निष्पक्ष तौर से कहा जाए तो कांग्रेस नेतृत्व का मुझे लेकर संदेह में रहना गलत नहीं है, मेरे बैकग्राउंड की वजह से ऐसा संदेह स्वाभाविक है कि मैं उनके प्रति 100 प्रतिशत वफादार रहूंगा या नहीं.' उन्होंने आगे कहा कि 'मैं पार्टी में शामिल होने जा रहा था.  ये फैसला किसी विशेष चुनाव को लेकर नहीं था. यह 2024 चुनावों को लेकर भी नहीं था.  यह कांग्रेस की एक बार फिर मजबूत शुरुआत को लेकर फैसला था.' उन्होंने यह भी कहा कि वो पार्टी के साथ '90 फीसदी मसलों पर सहमति' रखते हैं.

किशोर ने कहा, मैं कांग्रेस की तारीफ करता हूं. जिस विचारधारा और राजनीतिक मौजूदगी की वो नुमाइंदगी करती है, उसके बिना एक प्रभावी विपक्ष संभव नहीं है. हालांकि इसका मतलब नहीं है कि ये मौजूदा नेतृत्व के तहत आज की कांग्रेस के जरिये होगा. बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस में व्यापक बदलाव जरूरी
है.

तृणमूल कांग्रेस की मदद करने के अपने प्रयास का बचाव करते हुए (जिसे बहुत सारे लोगों द्वारा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी द्वारा मुख्य विपक्षी दल के तौर पर कांग्रेस की जगह लेने के प्रयास के तौर पर देखा गया) प्रशांत ने कहा कि ये प्रतिशोध नहीं है. उन्होंने कहा, "मेरा कद इतना छोटा है और इतनी बड़ी पार्टी से बदला लेने के बारे में मैं सोच भी कैसे सकता हूं. हमें एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है.

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कांग्रेस को एक विचार के तौर पर कमजोर होते हुए नहीं देखा जा सकता. उसकी मजबूती लोकतंत्र के हित में है." जब कांग्रेस से बड़े पैमाने पर नेताओं के तृणमूल में जाने पर सवाल किया गया तो प्रशांत किशोर ने कहा, “बंगाल चुनाव के बाद पार्टी के विस्तार के लिए तृणमूल कांग्रेस और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ( I-PAC) के बीच एक सहमति बनी है. कुछ अवसरों पर जब उन्हें मेरी जरूरत होती है तो मैं उपलब्ध रहता हूं.”