प्रशांत किशोर के मुताबिक चुनाव में ये है बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत

उन्होंने कहा कि वो ऐसे विपक्षी मोर्चे को बनाने में मदद करना चाहते हैं, जो 2024 में बीजेपी को हरा सके. अगर अगले महीने के विधानसभा चुनाव -जिसे सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है, अगर उसके नतीजे प्रतिकूल भी आते हैं तो भी ऐसा किया जा सकता है.

नई दिल्ली:

चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोमवार को बीजेपी ने हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद और लोक जनकल्याणकारी नितियों का मजबूत नैरेटिव तैयार किया है और विपक्षी दलों को कम से कम इनमें से कम से कम दो मोर्चों पर बीजेपी को पछाड़ना होगा. उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बीजेपी की लोकप्रियता केवल हिंदुत्व को बढ़ावा देने से ही नहीं है, लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है. दो अन्य तत्व जिन पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है, वे हैं अति-राष्ट्रवाद, जो उतना ही महत्वपूर्ण है जितना तेजी से बढ़ता हिंदुत्व और दूसरा आपके पास कल्याणवाद है.

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उन्होंने कहा कि घरेलू और व्यक्तिगत स्तर पर कल्याणवाद, राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म एक साथ रखें, यह काफी मजबूत नैरेटिव है. जब तक आपके पास अपनी खुद की कहानी के माध्यम से उनमें से दो को बेहतर बनाने की क्षमता नहीं है, तो आपके पास बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़ा होने की संभावना बहुत कम है. 

प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन करती है, इसका एक कारण यह है कि यहां राष्ट्रवाद तत्व काम नहीं करता और इसका मुकाबला करने के लिए आपके पास उप-क्षेत्रवाद है. वहीं जब राष्ट्रीय चुनावों की बात आती है, तो यह राष्ट्रवाद का मुद्दा उन्हें सभी खामियों को दूर करने का मौका देता है. 

उन्होंने कहा कि वो ऐसे विपक्षी मोर्चे को बनाने में मदद करना चाहते हैं, जो 2024 में बीजेपी को हरा सके. अगर अगले महीने के विधानसभा चुनाव -जिसे सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है, अगर उसके नतीजे प्रतिकूल भी आते हैं तो भी ऐसा किया जा सकता है.

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"क्या 2024 में बीजेपी को हराना संभव है? इसका जवाब हां है. बीजेपी को 2024 के आम चुनाव में हराना संभव है. लेकिन क्या विपक्ष की मौजूदा हालात के हिसाब से बीजेपी को हराना संभव है. संभवत नहीं. मैं ऐसे विपक्षी मोर्चे को बनाने में मदद करना चाहता हूं, जो 2024 में बीजेपी को मजबूत टक्कर दे सके. बिहार 2015 के बाद से एक भी 'महागठबंधन' सफल नहीं हुआ है. केवल पार्टियों और नेताओं का एक साथ आना पर्याप्त नहीं होगा. आपके पास मुद्दे और एक सुसंगत संगठन की आवश्यकता है. कोई भी पार्टी या नेता जो बीजेपी को हराना चाहता है, उसके पास 5-10 साल का नजरिया होना चाहिए. यह पांच महीने में नहीं हो सकता. लेकिन ऐसा होगा. यही लोकतंत्र की ताकत है."