
प्रतीकात्मक तस्वीर
हैदराबाद:
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने गुरुवार को इस बात पर अफसोस प्रकट किया कि भारत में काफी हद तक नेताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों में दिलचस्पी नहीं है और सशस्त्र बल रक्षा मंत्रालय से कटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा जान पड़ता है कि सघन राजनीतिक गतिविधि से समसामयिक भारतीय नेताओं के पास राष्ट्रीय मुद्दों से निपटने के लिए वक्त नहीं बचता या उनमें रुझान नहीं रहता।
इस अनदेखी की झलक सुरक्षा मामलों पर संसदीय बहस की पूर्ण अनुपस्थिति तथा रक्षा पर स्थायी समिति की ज्यादातर सिफारिशों पर अत्यल्प ध्यान के रूप में मिलती है। एडमिरल प्रकाश ने हैदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में दो दिवसीय वाषिर्क राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन संबोधन में कहा कि दरअसल इस अरुचि की वजह से निर्णय लेने की जिम्मेदारी असैन्य नौकरशाहों को दे दी जाती है जबकि उनमें से ज्यादातर जटिल सुरक्षा मामलों से अच्छी तरह वाकिफ नहीं होते।
उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत उसी नौकरशाही के पास सशस्त्रबलों का समग्र नियंत्रण एवं राष्ट्रीय रक्षा की जिम्मेदारी होती है। इस व्यवस्था का दुष्परिणाम होता है कि भारतीय सशस्त्र बल रक्षा मंत्रालय से कट जाता है और दोनों के बीच एकीकरण नहीं होता।
इस अनदेखी की झलक सुरक्षा मामलों पर संसदीय बहस की पूर्ण अनुपस्थिति तथा रक्षा पर स्थायी समिति की ज्यादातर सिफारिशों पर अत्यल्प ध्यान के रूप में मिलती है। एडमिरल प्रकाश ने हैदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में दो दिवसीय वाषिर्क राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन संबोधन में कहा कि दरअसल इस अरुचि की वजह से निर्णय लेने की जिम्मेदारी असैन्य नौकरशाहों को दे दी जाती है जबकि उनमें से ज्यादातर जटिल सुरक्षा मामलों से अच्छी तरह वाकिफ नहीं होते।
उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत उसी नौकरशाही के पास सशस्त्रबलों का समग्र नियंत्रण एवं राष्ट्रीय रक्षा की जिम्मेदारी होती है। इस व्यवस्था का दुष्परिणाम होता है कि भारतीय सशस्त्र बल रक्षा मंत्रालय से कट जाता है और दोनों के बीच एकीकरण नहीं होता।
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