Pegasus Scandal पर पैदा हुए विवाद के बीच पूर्व CJI रंजन गोगोई की प्रतिक्रिया

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर जिस महिला ने साल 2019 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, वह भी इजरायली स्पाइवेयर Pegasus के जरिए संभावित जासूसी की टारगेट लिस्ट में शामिल थीं.

Pegasus Scandal पर पैदा हुए विवाद के बीच पूर्व CJI रंजन गोगोई की प्रतिक्रिया

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई.

नई दिल्ली:

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर जिस महिला ने साल 2019 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, वह भी इजरायली स्पाइवेयर Pegasus के जरिए संभावित जासूसी की टारगेट लिस्ट में शामिल थीं. इस मामले पर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया. सीजेआई के पद से रिटायर होने के बाद भाजपा की ओर से राज्यसभा के लिए मनोनित किए गए रंजन गोगोई ने कहा, 'मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.'

केवल सरकारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इस स्पाइवेयर की संभावित जासूसी के लिए टारगेट लिस्ट में महिला से जुड़े 11 मोबाइल नंबर शामिल हैं. यह खुलासा द वायर, वाशिंगटन पोस्ट और अन्य मीडिया संस्थानों की ग्लोबल इंवेस्टिगेशन में हुआ है.

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द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रस नेता राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, दो केंद्रीय मंत्री, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और 40 भारतीय पत्रकार जासूसी के संभावित टारगेट थे. यह लिस्ट भारत की एक अज्ञात एजेंसी की है, जो कि इयरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप का स्पाइवेयर Pegasus यूज करती है. एनएसओ का कहना है कि यह अपना Pegasus स्पाइवेयर केवल 'जांची-परखी सरकारों' को ही आतंक से लड़ने के मकसद से देती है. किसी भी प्राइवेट कंपनी को यह स्पाइवेयर नहीं दिया जाता है.

जस्टिस गोगोई पर 2019 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की उस कर्मचारी का नाम सोमवार को रिपोर्ट में आया था. द वायर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, महिला से जुड़े हुए तीन नंबरो को जासूसी के लिए संभावित टारगेट के लिए चुना गया था. 20 अप्रैल, 2019 को एक हलफनामे में अपने आरोप दर्ज करने के कुछ दिनों बाद उन्हें कथित तौर पर 'पर्सन ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में मार्क किया गया था. 

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महिला के पति और उसके दो देवर के अन्य आठ नंबरों को भी संभावित निशाने के लिए लिस्ट में शामिल किया गया था.

जस्टिस गोगोई ने सभी आरोपों का खंडन किया करते हुए इन आरोपों को "पूरी तरह से झूठ और निंदनीय" करार दिया था. उन्होंने यह भी कहा था कि आरोप "न्यायपालिका की स्वतंत्रता" पर हमले की एक बड़ी साजिश है. 

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जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने उसकी शिकायत की जांच की, वह विशेष रूप से गठित की गई आंतरिक समिति के सामने पेश हुई. द वायर ने संभावना जताई है कि तभी उसके फोन से छेड़छाड़ की गई थी और उसके वकीलों के साथ उसकी बातचीत को ट्रैक किया गया था.


आंतरिक जांच ने जस्टिस गोगोई को आरोपों से बरी करते हुए तीन जजों के पैनल ने कहा था कि आरोपों में 'कोई सार नहीं' था.

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