
उदयपुर की अदालत में आबकारी विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि जब्त की गई शराब चूहे पी गए... (फाइल फोटो)
जयपुर:
उदयपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें आबकारी विभाग द्वारा 8 वर्ष पूर्व जब्त शराब को कथित रूप से चूहे पी गए. ऐसा विभाग की ओर से एक स्थानीय अदालत को एक बयान के जरिये बताया गया.
पूरी अदालत उस समय अचरज में पड़ गई, जब आबकारी विभाग के एक कर्मचारी पूरब सिंह सोमवार को शराब की खाली बोतलों के साथ अदालत में पेश हुए. कर्मचारी ने ऐसी आंशका जताई कि चूहे शराब पी गए. बचाव पक्ष के वकील गणपत चौधरी ने बताया, 'जब विभाग के कर्मचारी ने अदालत को शराब की बोतलें खाली होने का कारण प्राकृतिक बताया तब उनसे पूछा गया कि वह प्राकृतिक कारण क्या है, तब कर्मचारी ने बताया कि चूहे शराब पी गए. यह सुनकर अदालत में मौजूद सभी लोग अचरज में पड़ गए'.
चौधरी ने बताया कि अदालत ने विभाग के कर्मचारी के बयान दर्ज कर अगली सुनवाई के लिए 15 मई तय की है.
उन्होंने बताया कि 16 जून 2009 को विभाग ने उदयपुर के रोशन जी की बाडी निवासी पीयूष शुक्ला के घर से 36 बीयर की बोतल और 83 शराब के क्वाटर बरामद किए थे. अदालत से चौधरी ने विभाग को जब्त शराब की बोतलें साथ लाने का आग्रह किया था. इसी आग्रह पर विभाग के कर्मचारी शराब की खाली बोतलों के साथ अदालत में पेश हुए. शराब की एक भी बोतल पर ना तो केस नंबर था ना ही उन पर विभाग की सील थी.
(इनपुट भाषा से)
पूरी अदालत उस समय अचरज में पड़ गई, जब आबकारी विभाग के एक कर्मचारी पूरब सिंह सोमवार को शराब की खाली बोतलों के साथ अदालत में पेश हुए. कर्मचारी ने ऐसी आंशका जताई कि चूहे शराब पी गए. बचाव पक्ष के वकील गणपत चौधरी ने बताया, 'जब विभाग के कर्मचारी ने अदालत को शराब की बोतलें खाली होने का कारण प्राकृतिक बताया तब उनसे पूछा गया कि वह प्राकृतिक कारण क्या है, तब कर्मचारी ने बताया कि चूहे शराब पी गए. यह सुनकर अदालत में मौजूद सभी लोग अचरज में पड़ गए'.
चौधरी ने बताया कि अदालत ने विभाग के कर्मचारी के बयान दर्ज कर अगली सुनवाई के लिए 15 मई तय की है.
उन्होंने बताया कि 16 जून 2009 को विभाग ने उदयपुर के रोशन जी की बाडी निवासी पीयूष शुक्ला के घर से 36 बीयर की बोतल और 83 शराब के क्वाटर बरामद किए थे. अदालत से चौधरी ने विभाग को जब्त शराब की बोतलें साथ लाने का आग्रह किया था. इसी आग्रह पर विभाग के कर्मचारी शराब की खाली बोतलों के साथ अदालत में पेश हुए. शराब की एक भी बोतल पर ना तो केस नंबर था ना ही उन पर विभाग की सील थी.
(इनपुट भाषा से)
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