विज्ञापन
This Article is From Feb 15, 2026

8वीं सदी के इस मंदिर का अद्भुत इतिहास, जहां 'महाराणा' नहीं, बल्कि भगवान शिव को माना गया 'राजा'

उदयपुर शहर से 22 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी गांव में स्थित इस एकलिंगनाथ मंदिर का सदियों पुराना इतिहास है.

8वीं सदी के इस मंदिर का अद्भुत इतिहास, जहां 'महाराणा' नहीं, बल्कि भगवान शिव को माना गया 'राजा'

राजस्थान का मेवाड़ इतिहास के पन्नों में शौर्य, वीरता और त्याग के लिए दर्ज है. महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा की गाथाएं मेवाड़ को दुनिया के पटल पर अलग पहचान दिलाती है. खास बात यह है कि मेवाड़ के शासकों के ईष्टदेव भगवान शिव रहे हैं. यहां के महाराणाओं ने कभी भी खुद को राजा नहीं माना, बल्कि वो दीवान ही कहलाएं. शिव के स्वरूप 'एकलिंगनाथ' को ही मेवाड़ का राजा माना जाता है. उदयपुर शहर से 22 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी गांव में स्थित इस 'श्री एकलिंगजी' मंदिर का सदियों पुराना इतिहास है. आज महाशिवरात्रि के मौके पर पढ़िए यह खास रिपोर्ट. 

8वीं सदी में पड़ी थी नींव

मूलतः यह मंदिर 8वीं शताब्दी में बप्पा रावल ने बनवाया था. लेकिन इसे आंक्राताओं ने आंशिक रूप से नष्ट कर दिया था. महाराणा मोकल द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू किया गया और इसके बाद वर्तमान स्वरूप महाराणा रायमल (1473-1509) द्वारा प्रदान किया गया. 

Latest and Breaking News on NDTV

गर्भगृह में विराजे हैं चतुर्मुखी शिव

गर्भगृह में स्थित आकर्षक संगमरमर से शिल्पित चतुर्मुखी शिवलिंग महाराणा रायमल द्वारा 15वीं शताब्दी के अंत में स्थापित किया गया. इसके बाद समय-समय पर मेवाड़ शासकों द्वारा इसमें निर्माण कराया गया. 

कहा जाता है कि मेवाड़ के हरितराज ऋषि ने बप्पा रावल को बुलाया. लेकिन गाय की रखवाली के चलते बप्पा रावल देरी से पहुंचे तो पुष्पक विमान से ऋषि जाने लगे. ऐसे में बप्पा रावल वहां पहुंचे और देरी का कारण बताया. फिर ऋषि ने ऊपर से थूका, लेकिन बापा रावल ने अपना मुंह हटा लिया और थूक उनके एक पैर पर गिरा. ऋषि ने उन्हें वरदान दिया कि जहां-जहां यह पैर पड़ेगा, वहां मेवाड़ साम्राज्य स्थापित होगा.

हजारों की संख्या में हर रोज आते हैं श्रद्धालु

इस मंदिर का पूरा प्रबंध मेवाड़ पूर्व राजघराने द्वारा ही किया जाता है, यह राजघराने का निज मंदिर है. प्रभु के दर्शन करने के लिए हर रोज हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं. शिव रात्रि पर अलग-अलग पहर में यहां पूजा होती हैं और दर्शनार्थी रात से लेकर सुबह तक दर्शन करने पहुंचते हैं.  

यह भी पढ़ेंः कभी गाय चराने जाते थे चरवाहे, वहां कैसे पड़ी शिवालय की नींव? इस शिव मंदिर से जुड़ी मान्यता है बेहद खास

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Mahashivratri 2026, Mewar Royal Family, History, Eklingji Temple Udaipur, Eklingji Udaipur
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com