नई दिल्ली:
राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के पक्ष में अंकगणित होने के बावजूद भाजपा नीत विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) कुछ राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर इस राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार उतार सकता है।
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में संवाददाताओं से बातचीत में इसका संकेत दिया। उन्होंने कहा,‘मुझे लोकतंत्र में मुकाबले में कुछ भी गलत नजर नहीं आता।’
राजग का एक बहुत बड़ा वर्ग विधानसभा और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से महज कुछ महीने पहले राष्ट्रपति चुनाव में संप्रग के साथ नहीं खड़ा दिखना चाहता है।
आडवाणी ने सरकार के साथ उपराष्ट्रपति पद को लेकर एक दूसरे का समर्थन करने की संभावना से भी इनकार किया। माना जाता है कि भाजपा नेता जसवंत सिंह उपराष्ट्रपति पद के लिए इच्छुक हैं।
आडवाणी ने कहा, ‘हमने शुरू में ही इस संभावना से इनकार कर दिया। सुषमा स्वराज ने दो महीने पहले बयान भी दिया था। ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस और भाजपा एक हाथ से दो और दूसरे हाथ से लो की नीति अपना सकती है और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के लिए सहमति बना सकती हैं। इस पर सुषमा ने ‘ना’ कहा था।’
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में संवाददाताओं से बातचीत में इसका संकेत दिया। उन्होंने कहा,‘मुझे लोकतंत्र में मुकाबले में कुछ भी गलत नजर नहीं आता।’
राजग का एक बहुत बड़ा वर्ग विधानसभा और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से महज कुछ महीने पहले राष्ट्रपति चुनाव में संप्रग के साथ नहीं खड़ा दिखना चाहता है।
आडवाणी ने सरकार के साथ उपराष्ट्रपति पद को लेकर एक दूसरे का समर्थन करने की संभावना से भी इनकार किया। माना जाता है कि भाजपा नेता जसवंत सिंह उपराष्ट्रपति पद के लिए इच्छुक हैं।
आडवाणी ने कहा, ‘हमने शुरू में ही इस संभावना से इनकार कर दिया। सुषमा स्वराज ने दो महीने पहले बयान भी दिया था। ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस और भाजपा एक हाथ से दो और दूसरे हाथ से लो की नीति अपना सकती है और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के लिए सहमति बना सकती हैं। इस पर सुषमा ने ‘ना’ कहा था।’
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