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This Article is From Jun 26, 2019

राष्ट्रीय रिटेल व्यापार नीति दो सप्ताह में जारी होगी

राष्ट्रीय खुदरा नीति भारत में खुदरा व्यापार को सुव्यवस्थित करेगी और व्यापार करने में आसानी प्रदान करने के लिए सक्षम होगी  है.

राष्ट्रीय रिटेल व्यापार नीति दो सप्ताह में जारी होगी
प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय खुदरा नीति पर चर्चा के लिए व्यापार संघों के साथ आज वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में, डीपीआईआईटी के सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि राष्ट्रीय खुदरा नीति का एक मसौदा अगले दस दिनों में  जारी किया जाएगा. और उस पर व्यापार संघों से सुझाव मांगे जाएंगे !  उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के खुदरा व्यापार की जमीनी हकीकत को समझने के लिए सभी स्तरों पर अपना प्रयास किया है और तदनुसार नीति को व्यापारियों को कठिनाइयों से राहत देने और उन्हें अपने व्यवसाय को एक संगठित तरीके से विकसित करने के लिए  तैयार किया जा रहा है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक हो सकेगी . राष्ट्रीय खुदरा नीति भारत में खुदरा व्यापार को सुव्यवस्थित करेगी और व्यापार करने में आसानी प्रदान करने के लिए सक्षम होगी  है. उन्होंने कहा कि भारत में खुदरा व्यापार लगभग 650 बिलियन डॉलर और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है इसलिए राष्ट्रीय खुदरा नीति व्यापारियों एवं अन्य सम्बंधित वर्गों के लिए एक सुव्यस्थित व्यापारिक माहौल तैयार करेगी !

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) के राष्ट्रीय महामंत्री श्प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्रीय खुदरा नीति में खुदरा व्यापार के मौजूदा प्रारूप के उन्नयन और आधुनिकीकरण को शामिल किया जाना चाहिए. सरकार लगभग ई प्रणाली अपना चुकी  है, जबकि अब तक 7 करोड़ में से केवल 35% व्यापारी ही अपना व्यवसाय कम्प्यूटरीकृत कर पाए हैं बाकी 65% व्यापारियों को कंप्यूटर सिस्टम से जोड़ने के लिए गंभीर कदमों की आवश्यकता है और इसके लिए सरकार को व्यापारियों को कंप्यूटर खरीद पर  50% सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए.

उनका कहना था कि घरेलू व्यापार को नियंत्रित करने वाले सभी कानूनों, अधिनियमों और नियमों की समीक्षा की जानी चाहिए और निरर्थक कानूनों को खत्म किया जाना चाहिए. व्यापार के संचालन के लिए 28 से अधिक लाइसेंस के बजाय एक लाइसेंस होना चाहिए और उनके वार्षिक नवीनीकरण को समाप्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह व्यापारियों के लिए बहुत उत्पीड़न और भ्रष्टाचार का कारण बनता है. उनहोने आगे कहा कि  अधिक महिलाओं को उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नीति के तहत विशेष योजना की मांग के साथ ये सुझाव भी  दिया कि व्यापारियों के कौशल विकास को भी नीति में जगह मिलनी चाहिए और खुदरा व्यापार के लिए एक कौशल विकास परिषद का गठन करना बेहतर होगा. उन्होंने व्यापारियों पर लागू समग्र कर संरचना के सरलीकरण और व्यापारियों के लिए कर कलेक्टर का दर्जा देने  की भी मांग की !व्यापारियों को आसानी से ऋण नहीं मिल पाता है  और व्यापारियों को आसान तरीके से वित्त मिल सके, ऐसे कदम खुदरा नीति में शामिल किये जाने चाहिए . उन्होंने सुझाव दिया कि मुद्रा के मूल आदेश के अनुसार, गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को बैंकों के बजाय व्यापारियों को ऋण देने के लिए अधिकृत करना चाहिए और बैंकों को एनबीएफसी एवं एमएफआई को उनकी उधर क्षमता बढ़ाने के लिए  ऋण देना चाहिए. चूँकि सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अधिक इच्छुक है, इसलिए कार्ड भुगतान लेनदेन पर बैंक शुल्क सीधे सरकार द्वारा बैंक को सब्सिडी दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि खुदरा  नीति के तहत देश के  प्रत्येक जिले में व्यापार आयुक्त और जिला व्यापार सलाहकार समिति का प्रावधान होना चाहिए.  उन्होंने कारीगरों, हस्तशिल्प और अन्य विशेषीकृत क्षेत्र विशेष को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं का भी आह्वान किया. तथा व्यापारियों  के बीच कानूनी व्यापार विवादों के समाधान के लिए प्रत्येक राज्य में व्यापार ट्रिब्यूनल के गठन का भी सुझाव दिया. भारतीय खुदरा क्षेत्र को वैश्विक व्यापार के खिलाफ खड़े होने में सक्षम बनाने के लिए, सरकार को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक व्यापार प्रथाओं को अपनाने के लिए व्यापारियों को के लिए  विदेश अध्ययन दौरों, मेलों, प्रदर्शनियों, सेमिनारों आदि का आयोजन  करना चाहिए. बैठक में कैट के अलावा स्वदेशी जागरण मंच, लगु उद्योग भारती, रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीआईआई, फिक्की, एसोचैम, पीएचडी चैंबर और अन्य संगठन शामिल हुए.

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