नई दिल्ली:
यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर आज आयोजित भोज में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बढ़ रही नजदीकी साफ तौर पर दिखी। इस आयोजन में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे दलों के नेता समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद मौजूद थे।
इस पर समाजवादी पार्टी ने कहा है कि यूपीए की दावत में आवभगत और सोनिया−मनमोहन के साथ मुलायम के फोटो के ज्यादा मायने न निकाले जाएं। समाजवादी पार्टी सरकार की खामियां गिनाने में अब भी पीछे नहीं है।
यूपीए सरकार के दूसरे बड़े दल तृणमूल कांग्रेस के सिर्फ एक मंत्री सौगात राय ही इस आयोजन में शामिल हुए। हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने इस बात से इनकार किया कि मुलायम सिंह और लालू यादव को वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बिठाकर किसी को कोई संदेश देने की कोशिश की गई।
रेणुका ने कहा, यह किसी के लिए कोई संकेत नहीं है। हम सभी का सम्मान करते हैं। यह मुलायम सिंह यादव का शिष्टाचार है कि वह यहां आए। यह पूछे जाने पर कि क्या इसे वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जाए, उन्होंने कहा, लोकतंत्र में कुछ भी संभव है...लोकतंत्र में हमें सिर्फ बात करने से फायदा होता है और बात नहीं करने से कोई फायदा नहीं होता।
उधर, मुलायम ने भी राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कह कर इस नजदीकी को और पुख्ता किया, हालांकि उन्होंने यूपीए सरकार में शामिल होने के सवाल का नकारात्मक जबाब दिया।
इस पर समाजवादी पार्टी ने कहा है कि यूपीए की दावत में आवभगत और सोनिया−मनमोहन के साथ मुलायम के फोटो के ज्यादा मायने न निकाले जाएं। समाजवादी पार्टी सरकार की खामियां गिनाने में अब भी पीछे नहीं है।
यूपीए सरकार के दूसरे बड़े दल तृणमूल कांग्रेस के सिर्फ एक मंत्री सौगात राय ही इस आयोजन में शामिल हुए। हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने इस बात से इनकार किया कि मुलायम सिंह और लालू यादव को वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बिठाकर किसी को कोई संदेश देने की कोशिश की गई।
रेणुका ने कहा, यह किसी के लिए कोई संकेत नहीं है। हम सभी का सम्मान करते हैं। यह मुलायम सिंह यादव का शिष्टाचार है कि वह यहां आए। यह पूछे जाने पर कि क्या इसे वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जाए, उन्होंने कहा, लोकतंत्र में कुछ भी संभव है...लोकतंत्र में हमें सिर्फ बात करने से फायदा होता है और बात नहीं करने से कोई फायदा नहीं होता।
उधर, मुलायम ने भी राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कह कर इस नजदीकी को और पुख्ता किया, हालांकि उन्होंने यूपीए सरकार में शामिल होने के सवाल का नकारात्मक जबाब दिया।
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