- राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार के लैंड‑फॉर‑जॉब मामले में दिन‑प्रतिदिन ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है
- अदालत ने इस मामले में कुल 41 आरोपियों पर आरोप तय कर ट्रायल की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया है
- मीसा भारती और हेमा यादव ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर आरोपों को अस्वीकार किया और मुकदमे का सामना किया
लैंड‑फॉर‑जॉब मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस केस की सुनवाई को अब तेज़ करते हुए 9 मार्च से डे‑टू‑डे (हर रोज़) आधार पर ट्रायल शुरू करने का फैसला किया है. हाल ही में अदालत ने इस मामले में लालू परिवार सहित कुल 41 आरोपियों पर आरोप तय किए, जिससे ट्रायल का रास्ता साफ हुआ है.
सोमवार को इस मामले में मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुईं. उन्होंने सीबीआई द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे मुकदमे का सामना करने को तैयार हैं और किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई से इंकार करती हैं. दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए और कोर्ट से व्यक्तिगत पेशी में छूट मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया.
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इस साल जनवरी में कोर्ट ने इस केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि आरोपियों के खिलाफ कथित तौर पर एक 'ओवरआर्चिंग क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी' का मामला बनता है, जिसमें रेलवे की नौकरियों का इस्तेमाल जमीन हासिल करने के लिए सौदेबाज़ी के रूप में किया गया. जज ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक रोजगार को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने के पर्याप्त सबूत प्रारंभिक रूप से मौजूद हैं.
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे. सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में ग्रुप‑D नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों के परिवारों ने जमीन के छोटे‑छोटे प्लॉट लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर किए. यह ट्रांसफर बिहार के कई जिलों में हुआ और बाद में इन जमीनों को परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज किया गया।.
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि कई रेल जोनों में ये नियुक्तियां नियमों की अनदेखी करते हुए की गईं, जिससे यह मामला एक बड़े स्तर की साज़िश के रूप में देखा जा रहा है. अब कोर्ट का डे‑टू‑डे ट्रायल न केवल इस केस की गति बढ़ाएगा बल्कि लालू परिवार की राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों को और भी गंभीर बना सकता है.
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