मनमोहन सिंह ने कहा कि देश का विकास धीमा पड़ा है, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी है
- देश के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है - मनमोहन
- 'सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाला निर्माण उद्योग सिकुड़ रहा है'
- 'देश में लाखों नौकरियां खत्म हो रही हैं'
नई दिल्ली:
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था केवल सार्वजनिक खर्च के इंजन पर चल रही है. उन्होंने कहा कि देश का विकास धीमा पड़ा है, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी है. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में अपने भाषण में मनमोहन ने आर्थिक विकास में आई गिरावट पर चिंता जताई, जो गत तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में झलक रही है. उन्होंने रोजगार सृजन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी गहरी चिंता जताई.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मनमोहन ने कहा, 'भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016.17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए. भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है, मुख्यत: नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी की घोषणा के कारण.'
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है तथा अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय के इंजन पर चल रही है. पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन की स्थिति को सबसे चिंताजनक पहलू बताया. उन्होंने कहा, इसमें सबसे चिंताजनक बात रोजगार सृजन पर प्रभाव है. देश के युवाओं के लिए रोजगार मिलना बहुत कठिन हो गया है. देश में सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाला निर्माण उद्योग सिकुड़ रहा है. इसका मतलब है कि देश में लाखों नौकरियां खत्म हो रही हैं.
(इनपुट भाषा से)
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मनमोहन ने कहा, 'भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016.17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए. भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है, मुख्यत: नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी की घोषणा के कारण.'
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है तथा अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय के इंजन पर चल रही है. पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन की स्थिति को सबसे चिंताजनक पहलू बताया. उन्होंने कहा, इसमें सबसे चिंताजनक बात रोजगार सृजन पर प्रभाव है. देश के युवाओं के लिए रोजगार मिलना बहुत कठिन हो गया है. देश में सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाला निर्माण उद्योग सिकुड़ रहा है. इसका मतलब है कि देश में लाखों नौकरियां खत्म हो रही हैं.
(इनपुट भाषा से)
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