महंत नरेंद्र गिरि मौत मामला : क्यों 'दुश्मन' हो गया सबसे प्रिय शिष्य?

आनंद गिरी संतों के हीरो माने जाते हैं. फेयर, स्लिम, टॉल, लंबे बालों वाले खूबसूरत योग गुरु. नरेंद्र गिरि टीनेजर आनंद को हरिद्वार के किसी आश्रम से लाये थे.

प्रयागराज:

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Narendra Giri) की कथित आत्महत्या का मामला सुलझता नहीं दिख रहा है. महंत नरेंद्र गिरी के सुसाइड नोट में उनके चहेते शिष्य आनंद गिरी (Anand Giri) को इसके लिए जिम्मेदार ठहाराया गया है. आइए अब उस आनंद गिरि के बारे में जानते हैं, जिसे महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी खुदकुशी के लिए ज़िम्मेदार बताया है. वह कभी उनका इतना प्रिय शिष्य था कि लोग उसे ही उनका उत्तराधिकारी समझते थे. पिछले कुछ वक्त से गुरु शिष्य के रिश्ते खराब थे. झगड़े की वजह बाघम्बरी मठ की सैकड़ों करोड़ की जायदाद बताई जा रही है. आनंद गिरि, नरेंद्र गिरि पर मठ की समपत्तियों को बेचने का आरोप लगा रहे थे. अब नरेंद्र गिरी के सुसाइड नोट से वो खुद फंस गए हैं. लेकिन उनके शिष्य उनके समर्थन में अभियान चला रहे हैं.

आनंद गिरी संतों के हीरो माने जाते हैं. फेयर, स्लिम, टॉल, लंबे बालों वाले खूबसूरत योग गुरु. नरेंद्र गिरि टीनेजर आनंद को हरिद्वार के किसी आश्रम से लाये थे. वो उनके सबसे प्रिय शिष्य माने जाते थे. हर कोई उन्हें उनकी गद्दी का उत्तराधिकारी समझता था. लेकिन गुरु से झगड़ा हुआ तो उसे धर्म युद्ध कहने लगे.

आनंद गिरि ने कहा था कि आदि गुरु शंकराचार्य ने हम नागाओं को एक नारा दिया था: "एक हाथ में शस्त्र, एक हाथ में शास्त्र. आज यह विवाद गुरु शिष्य का नहीं है. मैं हार जाऊं, या वो हार जाएं. मैं जीत जाऊं या वो जीत जाएं. इस बात पे नहीं है. आज प्रयागराज की अस्मिता का सवाल है.

आनंद गिरी ने नरेंद्र गिरी पर बाघम्बरी मठ की 40 करोड़ की ज़मीन बेच डालने का आरोप लगाया. आनंद की तरफ से नरेंद्र गिरि पर ज़्यादातर हमले फेसबुक पे "वी सपोर्ट स्वामी आनंदगिरि" और " फैन्स स्वामी आनंदगिरि" नाम के फेसबुक पेज से होते थे. बीच में आनंद गिरि, नरेंद्र गिरि को नार्को टेस्ट कराने की भी चुनौती देने लगे.

आनंद गिरी ने कहा था कि मैं सच या झूठ बोल रहा हूं तो सरकार का सपोर्ट लेकर नार्को टेस्ट भी मेरा कराया जा सकता है. साथ ही साथ अपेक्षा यह भी करूंगा कि उधर से भी नार्को टेस्ट हो और अगर वो दोषी पाये जाएं तो उनपर भी कार्रवाई करने का आप सामर्थ्य रखिये.

याद दिला दें कि एक बार आनंद गिरि के समर्थकों के फेसबुक पेज पर नरेंद्र गिरी की एक ऐसी वीडियो जारी की गई जिसमें वह किसी शिष्य की शादी में नोट उड़ा रहे थे. बाद में वहां रंगारंग नृत्य भी हुआ. जब इसका इल्ज़ाम आनंद गिरी पर लगा तो उन्होंने इसकी सफाई में वीडियो मैसेज जारी किया.

आनंद गिरि ने वीडियो मैसेज में कहा था कि मैंने कोई वीडियो नहीं बनाई है. न मैंने किसी से कहा है कि वहां खड़े हो जाओ. फिर भी इसका आरोप मुझपर लगाया जा रहा है. उनके गुर्गों द्वारा अब मुझे षड्यंत्र में फंसाने की साज़िश की जा रही है.

आनंद गिरी सबसे ज़्यादा सुर्खियों में तब आये जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया में दो शिष्याओं से बदसुलूकी के इल्ज़ाम में गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन बाद में बरी हो गए. इन विवादों के बाद महंत नरेंद्र गिरी ने आनंद गिरी को बाघम्बरी मठ और निर्वाणी अखाड़े से निकाल दिया. लेकिन अखाड़े के लोगों ने सुलह कराई तब आनंद की माफी मांगते हुए वीडियो सामने आई थी.


वीडियों में उन्होंने कहा था कि मैं आनंद गिरी पूज्य गुरुदेव को कान पकड़ कर अपनी सारी ग़लतियों की सबसे पहले माफी मांगता हूं और पिछले दिनों जो भी विवाद हुआ, उस विवाद का जो भी कारण रहा हो. जो भी परिस्थितियां बनी हों, उन परिस्थितियों में जो मेरी ज़िम्मेदारी है, उसके लिए मैं क्षमा याचना करता हूं.

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गुरु-शिष्य में नया विवाद दुबारा तब शुरू हुआ जब आनंद ने अपने गुरु को बताए बिना हरिद्वार में आश्रम बना लिया. अब आनंद की पुलिस हिरासत के बाद उनके समर्थक उनकी हिमायत में अभियान चला रहे हैं. इसे लेकर स्वामी कल्याण देव ने कहा कि उनके (आनंद गिरी) ऊपर बेकार के अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं. यह तो एक तरह से युवा संतो को फंसाने के लिए, चारों तरफ से घेरने की कोशिश है.

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