नई दिल्ली:
छत्तीसगढ़ में अगवा सुकमा जिले के जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए नक्सलियों के साथ बातचीत पर जहां अभी अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं मंगलवार को जिलाधिकारी तक जरूरी दवाएं पहुंचाई गईं।
नक्सलियों द्वारा मध्यस्थों के रूप में सुझाए गए तीन नामों में से दो के पीछे हट जाने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को नक्सलियों से बातचीत के लिए दो पूर्व मुख्य सचिवों को नामित किया।
जनजातीय नेता मनीष कुंजम ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 221 के समीप चिंतागुफा के नजदीक एक वनक्षेत्र में बंधक बनाए गए मेनन तक दवाईयां एवं कपड़ों को पहुंचाया गया है। यह इलाका आंध्र प्रदेश के खमाम जिले के नजदीक है।
ज्ञात हो कि चिंतागुफा इलाके में ही छह अप्रैल 2010 को नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 75 जवानों सहित 76 सुरक्षाकर्मियों की हत्या की थी।
मेनन की पत्नी आशा से अस्थमा, निर्जलीकरण एवं आंख में पड़ने वाली दवाईयों को लेकर कुंजम मेनन के ठिकाने की ओर रवाना हुए।
कुंजम के मुताबिक आशा मेनन ने उनसे कहा कि वह एक इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के रूप में उनके पति की एक वीडियो क्लिप नक्सलियों से देने की अपील करेंगे।
एक सूत्र ने बताया कि मेनन तक दवाईयों को जिस तरीके से पहुंचाया जा रहा है, उससे लगता है कि मेनन का स्वास्थ्य काफी गम्भीर है।
वहीं, नक्सलियों की ओर से बातचीत के लिए नियुक्त सर्वोच्च न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वह मध्यस्थता नहीं कर सकते क्योंकि अधिकारी अभी भी नक्सलियों की हिरासत में हैं जबकि कुंजम ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया।
नक्सलियों ने सोमवार शाम को उनकी ओर से मध्यस्थता के लिए सर्वोच्च न्यायालय के वकील और टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य प्रशांत भूषण, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष बीडी शर्मा और अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के अध्यक्ष मनीष कुंजम का नाम आगे बढ़ाया था।
वहीं, मुख्यमंत्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से नक्सलियों से बातचीत के लिए दो पूर्व मुख्य सचिवों को नामित किया।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पत्रकारों से कहा, "मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव एसके मिश्रा एलेक्स पॉल मेनन की सुरक्षित एवं शीघ्र रिहाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से नक्सलियों के साथ बातचीत करेंगे।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने मध्यस्थों से बात की है। नक्सलियों से बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और किसी समयसीमा के संदर्भ में बातचीत को नहीं बांधा जाना चाहिए।"
मध्यस्थ के रूप में नामित होने के ठीक बाद मिश्रा ने कहा कि मेनन की रिहाई के लिए वह सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे।
मिश्रा ने कहा, "नक्सलियों की मांगों के सम्बंध में, मैं छत्तीसगढ़ सरकार के सम्पर्क में हूं लेकिन एक समयसीमा में सब कुछ कर पाना सम्भव नहीं है।"
भूषण ने हालांकि कहा, "वह निर्दोष के जीवन को बंधक बनाकर मध्यस्थता नहीं कर सकते।"
भूषण ने कहा कि वह निर्दोष जनजातियों को रिहा करने और ऑपरेशन ग्रीन हंट समाप्त करने की नक्सलियों की मांग को न्यायसंगत मानते हैं, लेकिन जब तक वे मेनन को बंधक बनाए रखेंगे, वह उनकी ओर से मध्यस्थता नहीं करेंगे।
भूषण के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा, "यदि वह सोचते हैं कि नक्सलियों की मांगें जायज हैं तो उन्हें जाना चाहिए और बातचीत करनी चाहिए। जो अगवा हुए हैं, उनके परिवारों की दशा भूषण को समझनी चाहिए। लेकिन ऐसे एक बुद्धिहीन व्यक्ति से कौन समझ की बात कर सकता है।"
चौधरी ने मीडिया से कहा कि वह भूषण की बातों को न फैलाए।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के 32 वर्षीय मेनन वर्ष 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं। नक्सलियों ने शनिवार को सुकमा जिले के एक जंगली इलाके में बंदूक के बल पर मेनन को अगवा कर लिया। मेनन यहां जनजातीय लोगों से बातचीत करने गए थे। नक्सलियों ने उनके दो अंगरक्षकों की गोली मारकर हत्या कर दी।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने कहा है कि मेनन पूरी तरह सुरक्षित हैं।
नक्सलियों द्वारा मध्यस्थों के रूप में सुझाए गए तीन नामों में से दो के पीछे हट जाने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को नक्सलियों से बातचीत के लिए दो पूर्व मुख्य सचिवों को नामित किया।
जनजातीय नेता मनीष कुंजम ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 221 के समीप चिंतागुफा के नजदीक एक वनक्षेत्र में बंधक बनाए गए मेनन तक दवाईयां एवं कपड़ों को पहुंचाया गया है। यह इलाका आंध्र प्रदेश के खमाम जिले के नजदीक है।
ज्ञात हो कि चिंतागुफा इलाके में ही छह अप्रैल 2010 को नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 75 जवानों सहित 76 सुरक्षाकर्मियों की हत्या की थी।
मेनन की पत्नी आशा से अस्थमा, निर्जलीकरण एवं आंख में पड़ने वाली दवाईयों को लेकर कुंजम मेनन के ठिकाने की ओर रवाना हुए।
कुंजम के मुताबिक आशा मेनन ने उनसे कहा कि वह एक इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के रूप में उनके पति की एक वीडियो क्लिप नक्सलियों से देने की अपील करेंगे।
एक सूत्र ने बताया कि मेनन तक दवाईयों को जिस तरीके से पहुंचाया जा रहा है, उससे लगता है कि मेनन का स्वास्थ्य काफी गम्भीर है।
वहीं, नक्सलियों की ओर से बातचीत के लिए नियुक्त सर्वोच्च न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वह मध्यस्थता नहीं कर सकते क्योंकि अधिकारी अभी भी नक्सलियों की हिरासत में हैं जबकि कुंजम ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया।
नक्सलियों ने सोमवार शाम को उनकी ओर से मध्यस्थता के लिए सर्वोच्च न्यायालय के वकील और टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य प्रशांत भूषण, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष बीडी शर्मा और अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के अध्यक्ष मनीष कुंजम का नाम आगे बढ़ाया था।
वहीं, मुख्यमंत्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से नक्सलियों से बातचीत के लिए दो पूर्व मुख्य सचिवों को नामित किया।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पत्रकारों से कहा, "मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव एसके मिश्रा एलेक्स पॉल मेनन की सुरक्षित एवं शीघ्र रिहाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से नक्सलियों के साथ बातचीत करेंगे।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने मध्यस्थों से बात की है। नक्सलियों से बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और किसी समयसीमा के संदर्भ में बातचीत को नहीं बांधा जाना चाहिए।"
मध्यस्थ के रूप में नामित होने के ठीक बाद मिश्रा ने कहा कि मेनन की रिहाई के लिए वह सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे।
मिश्रा ने कहा, "नक्सलियों की मांगों के सम्बंध में, मैं छत्तीसगढ़ सरकार के सम्पर्क में हूं लेकिन एक समयसीमा में सब कुछ कर पाना सम्भव नहीं है।"
भूषण ने हालांकि कहा, "वह निर्दोष के जीवन को बंधक बनाकर मध्यस्थता नहीं कर सकते।"
भूषण ने कहा कि वह निर्दोष जनजातियों को रिहा करने और ऑपरेशन ग्रीन हंट समाप्त करने की नक्सलियों की मांग को न्यायसंगत मानते हैं, लेकिन जब तक वे मेनन को बंधक बनाए रखेंगे, वह उनकी ओर से मध्यस्थता नहीं करेंगे।
भूषण के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा, "यदि वह सोचते हैं कि नक्सलियों की मांगें जायज हैं तो उन्हें जाना चाहिए और बातचीत करनी चाहिए। जो अगवा हुए हैं, उनके परिवारों की दशा भूषण को समझनी चाहिए। लेकिन ऐसे एक बुद्धिहीन व्यक्ति से कौन समझ की बात कर सकता है।"
चौधरी ने मीडिया से कहा कि वह भूषण की बातों को न फैलाए।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के 32 वर्षीय मेनन वर्ष 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं। नक्सलियों ने शनिवार को सुकमा जिले के एक जंगली इलाके में बंदूक के बल पर मेनन को अगवा कर लिया। मेनन यहां जनजातीय लोगों से बातचीत करने गए थे। नक्सलियों ने उनके दो अंगरक्षकों की गोली मारकर हत्या कर दी।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने कहा है कि मेनन पूरी तरह सुरक्षित हैं।